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शिक्षकों ने बनाया मानस को बेहतर संस्कार का जरिया

अरुण कुमार सिंह/मुनिदेव पाठक संतकबीर नगर।प्रात काल उठि के रघुनाथा। मात पिता गुरु नाइय माथा।। सकल सौच करि जाइ नहाए। नित्य निबाहि मुनिहि सिर नाए।। मानस की ये चौपाइयां किसी शिक्षा मन्दिर में गूंजे तो अनायास ही विद्यार्थी संस्कारों से जुड़ता चला जाएगा।

शायद यही सोच रही होगी बघौली ब्लाक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय, मेड़रापार (बखिरा) में आज से 40 वर्ष पूर्व विद्यार्थियों के लिए मानस पाठ की शुरूआत करने वाले गुरुजनों की। परम्परा बन चुका है यहां पर रोजाना रामचरितमानस का पाठ। प्रार्थना के बाद मानस का पाठ और उसके बाद अध्यापन का कार्य रोजाना शुरू होता है।

वर्ष 1935 में अंग्रेजी हुकूमत में स्थापित मिडिल स्कूल मेड़रापार बर्तन नगरी बखिरा से सटे अवस्थित है। इस विद्यालय की गिनती कभी जिले के गणमान्य विद्यालयों में होती थी। विद्यालय में वर्ष 1972 में आए डी आई बाबू जंगबहादुर सिंह और तत्कालीन प्रधानाध्यापक राम दौलत राय ने उसी साल जुलाई माह में इस विद्यालय के प्रांगण में आपसी भाईचारा कायम रखने और सभी शिक्षकों के सहयोग से यह तय किया कि यहां पर प्रार्थना के बाद श्रीरामचरितमानस का पाठ होगा। इसके बाद शुरु हो गया मानस का पाठ।

विद्यालय की प्रार्थना के बाद प्रतिदिन यहां मानस के दो दोहों का सस्वर वाचन विद्यार्थियों द्वारा किया जाता है। पहले शिक्षक चौपाई और दोहों को पढ़ते हैं उसके बाद सभी छात्र उसे दोहराते हैं। दो दोहों के सस्वर वाचन के बाद शिक्षक उन दोहों का अर्थ भी बच्चों को बताते हैं तथा बच्चों के अन्दर की जिज्ञासा को भी शान्त करते हैं। यहां मानस के 1075 दोहे तीन साल में समाप्त होते हैं। सरकारी आकड़ों के अनुसार इस विद्यालय में वर्ष 1993 तक 32 अध्यापक और 1400 छात्र छात्राएं अध्ययन करते थे। विद्यालय में भारी संख्या में मुस्लिम समुदाय के बच्चों भी पढ़ते थे, लेकिन कभी किसी अभिभावक और न ही शिक्षक ने इस बात का प्रतिरोध किया कि यहां पर मानस का पाठ क्यों होता है? वर्ष 2009 में उर्दू शिक्षक की सेवा समाप्त होने के बाद भी यहां पर अभी 32 मुस्लिम छात्रों समेत कुल 360 छात्र- छात्राएं अध्ययनरत हैं। वर्तमान में यहां पर तीन शिक्षक हैं। प्रधानाध्यापक रामचरन व सहायक अध्यापक दयाशंकर पाण्डेय तथा रामअधीन।

मानस पाठन और अध्ययन में तीनों शिक्षक प्रवीण हैं लेकिन वर्तमान में यह कार्य दयाशंकर पाण्डेय के जिम्मे है। वे बच्चों को मानस का पाठ कराते हैं। उनकी अनुपस्थिति में यह कार्य प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक करते हैं। इंसर्टहर तीसरे साल बदल जाता है संपुटमानस पाठ के दौरान संपुट भी पढ़ा जाता है। संपुट वह चौपाई होती है जो दास्य भाव की भक्ति को प्रकट करती है। इस चौपाई को हर दोहे के पहले और दोहे के बाद में पढ़ा जाता है। वर्तमान समय में संपुट की चौपाई है- नाथ सकल मैं साधन हीना।

कीन्ही कृपा जानि जनि दीना।। अर्थात हे नाथ मैं साधन हीन हू, मुझको दीन समझकर मेरे ऊपर कृपा करिए। चूंकि मानस तीन साल में समाप्त होता है। इसलिए हर तीसरे साल सम्पुट की यह चौपाई भी बदल जाती है। ..और समाजसेवी ने दिए विद्यालय को दो सौ मानसपहले विद्यालय में श्रीरामचरितमानस के 25 गुटखे थे। प्रार्थना के समय हर लाइन में एक गुटखा दिया जाता था और बच्चों इसी से मानस पाठ करते थे, लेकिन जुलाई वर्ष 2012 में खुटवा गांव के चन्द्रशेखर पाठक विद्यालय पर आए और बच्चों को मानस का पाठ करते देखा तो वे भावविभोर हो गए। वे इतना प्रभावित हुए कि कई बच्चों को बुलाकर उन्होंने मानस वाचन को कहा तो बच्चों ने उसका सस्वर वाचन किया। इसके बाद इसके बाद वे वहीं से गोरखपुर चले गए और गीता प्रेस से मानस की बड़ी टीका वाली 200 प्रतियां खरीदीं और विद्यालय में छुप्ती होने के पहले ही पहुंचा दीं। इसके बाद तो वे हर सप्ताह किसी न किसी दिन विद्यालय में पहुंच जाते हैं और बच्चों से मानस का प्रसंग सुनते हैं। वे आते हैं और बच्चों ही नहीं शिक्षकों से भी कहते हैं कि कभी भी मेरे लायक कोई सेवा हो तो बताइएगा।

भगवान का दिया जो मेरे पास है उससे मैं विद्यालय की सेवा करुंगा। तीन वर्ष में एक बार समाप्त होता है मानसश्रीराम चरित मानस के इस पाठ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह तीन वर्ष में एक बार समाप्त होता है। पहली बार जो छात्र कक्षा 6 में प्रवेश लेता है। वह कक्षा 8 तक पहुंचते-पहुंचते पूरी मानस समाप्त कर देता है। यदि बीच में किसी व्यवधान के चलते विद्यालय बन्द होता है तो प्रतिदिन चौपाइयों की संख्या में वृद्धि कर दी जाती है और मानस पाठ को पूर्ण कर लिया जाता है। इस तरह से होती है कक्षा 8 के छात्रों की विदाईमानस पाठ के पूर्ण होने के बाद कक्षा 6 से 8 में पहुंचे छात्रों की विदाई का समय भी आ जाता है। जिस दिन पूरा मानस पूर्ण हो जाता है उस दिन स्थानीय अभिभावकों, शिक्षकों और समाजसेवियों की तरफ से एक वृहद भण्डारे का आयोजन किया जाता है। उस दिन सभी बच्चों और शिक्षकों की तरफ से कक्षा 8 के छात्रों को भावभीनी विदाई दी जाती है।

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