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चाल क्यों बदल जाती है घुटने की सजर्री के बाद

मैं कई लोगों को जानता हूं, जिन्होंने अपने घुटने का ऑपरेशन करा लिया है। घुटने की सजर्री तीन से चार लाख रुपये में होती है। पर मैंने किसी को ऑपरेशन के बाद ठीक से चलते नहीं देखा। अपने अटल बिहारी वाजपेयी को ही लें। वह ऑपरेशन से पहले काफी ठीकठाक चलते थे। लेकिन उसके बाद थके-थके से चलते रहे। मेरे दोस्त मुजतबा हैदराबाद में रहते हैं। एक शाम वह घर आए। उन्होंने अपने घुटने में दर्द की शिकायत की। और मेरे सेकेट्ररी लछमन दास तो चल-फिर ही नहीं पाते हैं। वह तो बिस्तर से ही चिपक गए हैं। अब सही वक्त है, जब डॉक्टर इस मामले पर गौर करें और घुटना बदलने को कारगर बनाएं।

साराभाई परिवार और माना
हाल ही में दो मेहमान मेरे यहां आए। उन्होंने मुझे याद दिलाया कि अरसे से साराभाई परिवार के साथ मेरे रिश्ते रहे हैं। खासतौर से गौतम और गिरा के साथ। एक वक्त था, जब साराभाई देश के गिने-चुने अमीरों में शामिल थे। और ये लोग बेहद टैलेंटेड थे। उस परिवार ने विज्ञानी दिए। नृत्यांगनाएं दीं और समाज सेवी दिए। गौतम सचमुच मेरे बेहद करीब था। उसके दुनिया छोड़ने के बाद गिरा ने उस रिश्ते को निभाया। सबसे बड़े साराभाई को बॉस कहा जाता था। उन्हें कश्मीर में शेख अब्दुल्ला का साथ देने के लिए याद किया जाता है। नेहरू ने  गुस्से में उन्हें जेल भिजवा दिया था। बाकी साराभाई शिक्षा, कला व संस्कृति के काम में लगे रहे। इन लोगों ने अपने- अपने क्षेत्र में बेहतरीन काम किया। यह परिवार अहमदाबाद में एक साथ रहता है। उसका नाम है रिट्रीट। यह शीशे का घर है। गुजराती में उसे कांचनो घर कहा जाता है। मैं जब भी अहमदाबाद जाता था, तो गौतम या गिरा का मेहमान बनता। दरअसल, उस दिन मेरे घर माना अपने पति के साथ आई थी। गौतम की बेटी है माना। उसके पति अंगरेज हैं और इंग्लैंड की फुटबॉल टीम के कप्तान हैं। माना बला की खूबसूरत है। मैं तो उससे अपनी आंखें हटा ही नहीं सका। अगले दिन वे लंदन चले गए।

अल्लाह खैर करे
अपनी पिछली लाहौर यात्रा में सैयदा हिना बाबर अली से मुलाकात हुई थी। अब सालों बाद उन्होंने अपनी कविता की किताब ‘अ रोज’ मुझे भेजी है। पहली कविता ‘अ प्रेयर फॉर पाकिस्तान’ यानी पाकिस्तान के लिए प्रार्थना है। अब जो पाकिस्तान का सच है, वही हिन्दुस्तान का भी है। जरा एक बानगी तो देखिए-

अल्लाह से एक दुआ है।
वह भटके हुओं को रास्ता दिखाए
उन्हें समझदारी और समर्पण की जिंदगी जीने में मदद करे
एक जिंदगी जो मिशन पर कुर्बान हो
एक जिंदगी जहां उसकी रजा से बने एक बेहतर कल
लोगों को मिल सके रहनुमाई, हिफाजत और ताकत
अभी सब खत्म नहीं हुआ है
पाकिस्तान के लिए अल्लाह खैर करे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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