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मंदी और अर्थव्यवस्था

कुछ दिन पहले संपादकीय पेज पर प्रकाशित ‘ऑक्यूपाई आंदोलन और सच का सामना’ शीर्षक लेख पढ़ा। इसमें लेखक ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आय की विषमताओं का जिक्र किया था। दरअसल, अमेरिका शुरू से ही पूंजीवादी व्यवस्था का पोषक रहा है। इसलिए अमेरिका में अमीर और गरीब वर्ग का अंतर हर साल बढ़ता जा रहा है और बेरोजगारी की दर नौ फीसदी से कम नहीं हो पा रही है। परंतु यह अवधारणा अमेरिका तक ही सीमित रहती, तो कोई बात नहीं थी।  इससे हमारी या किसी दूसरे देश की अर्थव्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ता। लेकिन मौजूदा युग में या तो सब अमेरिकी अर्थव्यवस्था की नकल करते हैं या मुक्त बाजार नीति की वजह से सबकी अर्थव्यवस्था एक-सी हो गई है। वर्ष 2006 की विश्वव्यापी मंदी अमेरिका से ही आरंभ होकर सभी देशों में फैली थी। इसने विश्व अर्थव्यवस्था को हिला दिया। 1930 की मंदी भी अमेरिका से ही प्रारंभ हुई थी। पर उस समय इसका प्रारूप कुछ भिन्न था, क्योंकि तब भूमंडलीकरण नहीं था। क्या इस प्रकार की आर्थिक घटनाएं मुक्त बाजार की अवधारणा पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाती हैं?
नवीनचंद्र तिवारी
tewari.navinchandra@gmail.com

गैरकानूनी फैक्टरियां
हाल ही में दिल्ली के एक आवासीय इलाके में गैरकानूनी तरीके से चल रही एक फैक्टरी का बॉयलर फट गया। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हो गए। फिर भी दिल्ली पुलिस और एमसीडी इससे बेखबर रही। इस हादसे से दोनों एजेंसियों के कामकाज पर सवाल उठने लाजिमी हैं। कहीं भी इमारतें खड़ी की जाती हैं, तो दोनों ही एजेंसियां वहां आ धमकती हैं। फिर कार्रवाई की धमकी देकर मनमानी रकम वसूल जाती हैं। परंतु सैदुलाजाब जैसे कई गांवों में घर-घर में चल रही गैरकानूनी फैक्टरियों पर इनकी नजर नहीं पड़ती है।
एन के जैन, सैदुलाजाब, दिल्ली

आवारा पशुओं से परेशानी
सड़कों पर घूमते आवारा पशुओं से गंदगी फैलती है और ट्रैफिक जाम लगता है। यही नहीं, कई बार इन्हें बचाने की कोशिश में सड़क दुर्घटनाएं हो जाती हैं। अब तक इस तरह के हादसे में कई लोगों की मौत हो चुकी हैं। पिछले दिनों शाहजहांपुर के अंटा चौराहे पर एक बच्चे को सांड ने पटक-पटककर मार डाला। लोगों के गुस्से को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सांड को पकड़कर शहर से बाहर छोड़ दिया। लेकिन क्या इतने भर से समस्या का समाधान हो जाता है? कतई नहीं। प्रशासन ने डेयरी मालिकों को सड़कों पर भैंसों को निकालने का समय भी बता रखा है। लेकिन इस आदेश का कहीं भी पालन नहीं होता है। दिन भर भैंसें सड़कों पर होती हैं। इस दिशा में प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे।
मोहम्मद कामरान अंसारी, महमानशाह, शाहजहांपुर

युवाओं की याद
कांग्रेस पार्टी संसद में और संसद से बाहर चौतरफा घिरी है। ऊपर से उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं। आसन्न खतरे को भांपते हुए पार्टी ने भ्रष्टाचार, महंगाई और काले धन जैसे अहम मुद्दों पर माकूल जवाब की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को इन सब पर जवाब देने के लिए आगे किया जा रहा है। वहीं युवा नेताओं के जरिये आम लोगों को सुनहरे भारत का सपना दिखाने की कोशिश भी हो रही है। वैसे यह ठीक भी है। इस बहाने ही सही, पर युवाओं को राजनीति का ककहरा सीखने का मौका तो मिलेगा। निश्चित रूप से इसके लिए कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी प्रशंसा के पात्र हैं। कांग्रेस का हाथ, युवाओं के साथ है। पर चुनाव जीतने के लिए और भी सार्थक कदम उठाने होंगे।
रामअवध गौड़, पियरिया धर्मशाला, आजमगढ़

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