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नॉन-कोर कोर्स, रुझान कम लेकिन मौके ज्यादा

इंजीनियरिंग के क्षेत्र में गैर-परंपरागत कोर्सों में लगातार करियर स्कोप बढ़ रहा है। पहले जहां एक या दो गैर-परंपरागत कोर्स (नॉन-कोर कोर्स) ही थे, वहीं अब विश्वविद्यालयों में कई नए कोर्स शुरू हो चुके हैं। इसके बावजूद इन कोर्सों की तरफ छात्रों का रुझान कम है।

दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ.पी.बी. शर्मा ने बताया कि अक्‍सर देखा गया है कि छात्रों और उनके अभिभावकों का रुझान मौजूदा बाजार को देखते हुए ही तय होता है। वह मौजूदा जॉब मार्केट को देख कर ही अपना क्षेत्र चुनते हैं। बीटेक में दाखिला लेने वाला छात्र आज के ट्रेंड पर ही अपना क्षेत्र चुनता है। वह अपने कोर्स के खत्म होने की अवधि के समय के ट्रेंड के बारे में नहीं सोचता। शर्मा ने बताया कि इन सब में सकारात्मक बात यह है कि देश में नए-नए रिसर्च सेंटर आ रहे हैं जिसके चलते आने वाले समय में गैर-परंपरागत कोर्सों की मांग स्वाभाविक तौर पर कई गुना बढ़ जाएगी। गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. डी. के. बंधोपाध्याय ने बताया कि छात्रों और अभिभावकों का माइंड सेट होता है जिसे तोड़ना आसान नहीं है। पहले से चले आ रहे परंपरागत कोर्सों का बाजार देख चुके यह लोग बिना किसी एक्सपेरिमेंट के पुराने ट्रेंड पर ही चलना पसंद करते हैं। सिर्फ इंजीनियरिंग में ही नहीं बल्कि मैनेजमेंट क्षेत्र में भी यह तथ्य सामने आया है। गैर-परंपरागत कोर्सों में नौकरी के विकल्प बढ़ रहे हैं। उम्मीद है कि आने वाले समय में छात्रों के लिए इस क्षेत्र में कई नई राहें खुलेंगी।

नए विकल्प  भी कारगर
पी. बी. शर्मा ने बताया कि डीटीयू ने बीटेक स्तर पर नौ और पीजी स्तर पर चार नए गैर-परंपरागत कोर्स शुरू किए हैं। इनमें इंजीनियरिंग फिजिक्स, इंजीनियरिंग मैथेमेटिक्स एंड कम्प्यूटिंग, माइक्रोवेव ऑप्टिकल कम्यूनिकेशन, नैनो साइंसेज, बायो इंफरेमेटिक्स, डिजिटल सिस्टम एंड डिजाइन, इनफरेमेशन आदि कोर्स शामिल किए हैं। इसके अलावा प्लास्टिक इंजीनियरिंग पहले से ही विश्वविद्यालय में मौजूद हैं।

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