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खाद बनाकर महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

शांति देवी को अब बच्चों की फीस और गृहस्थी के दूसरे तमाम खर्च के लिए पति की जेब पर निर्भर नहीं होना पड़ता है, क्योंकि वह स्वयं सहायता समूह के जरिए वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार करके उससे होने वाली आमदनी से अपने और परिवार की जिंदगी संवार रही हैं।

उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले की रामपुर पैड़ा गांव निवासी शांति देवी (46) ने हिम्मत और जीवटता के बल पर पहले गांव की ही महिलाओं का एक स्वयं सहायता समूह बनाया और वर्मी कम्पोस्ट निर्माण के जरिये गरीबी को पीछे छोड़कर जीवन में खुशहाली ले आईं। आज यह समूह गांव की अन्य कई महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रहा है।

शांति ने कहा, ''यकीन नहीं होता कि जिन चार पैसों के चलते हमें कुछ साल पहले गृहस्थी से जुड़ी अपनी इच्छाओं को मारना पड़ता था, आज वे आसानी से पूरी हो जाती हैं।'' वह कहती हैं, ''इसका श्रेय मैं जिले के कृषि अधिकारियों को देना चाहूंगी, जिनकी प्रेरणा से हमने स्वयं सहायता समूह बनाकर वर्मी कम्पोस्ट बनाना शुरू किया।''

शांति कहती हैं, ''वर्ष 2007 में कृषि विभाग के अधिकारियों ने गांव का दौरा किया था और उस दौरान उन्होंने हमें वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा था कि यह कार्य न सिर्फ रोजगारपरक है, बल्कि हम भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ा सकती हैं।''

शांति सहित जब गांव की अन्य महिलाओं ने इस काम को करने में दिलचस्पी दिखाई तो कृषि अधिकारियों ने गांव में शिविर लगाकर उन्हें वर्मी कम्पोस्ट बनाने का प्रशिक्षण दिया और आश्वासन दिया कि उनके द्वारा बनाई जाने वाली वर्मी कम्पोस्ट को वह जिले के दूसरे इलाके में बिक्री कराने में सहयोग करेंगे।

शांति देवी ने गांव के अन्य महिलाओं के साथ स्वयं सहायता समूह बनाया। वर्ष 2007 में गठित हुए समूह में उन्हीं की तरह कुल 15 महिलाएं हैं, जो पहले रोजी-रोटी के लिए मजदूरी करती थीं। ज्ञात हो कि केंचुओं के मल से तैयार खाद ही वर्मी कम्पोस्ट कहलाती है। यह सब प्रकार की फसलों के लिए प्राकृतिक, सम्पूर्ण एवं संतुलित आहार मानी जाती है।

शांति बताती हैं कि शुरुआत में कृषि विभाग की सहायता से केंचुए और शेड उपलब्ध कराए गए। आज समूह के पास अपने 100 शेड हैं जिनमें गोबर के साथ अनुपात में केचुओं को डाल दिया जाता है। उनके मल से जो वर्मी कम्पोस्ट तैयार होती है उसकी बिक्री की जाती है।

करीब एक क्विंटल गोबर में दो किलोग्राम केंचुए डाले जाने पर उनसे 50 से 60 किलोग्राम वर्मी कम्पोस्ट तैयार होती है। यह 250 से 300 रुपये प्रति क्विंटल बिकती है।

समूह की दूसरी सदस्य कुसमा कहती हैं, ''आज जिले के विभिन्न इलाकों के किसान खुद हमारे पास आकर हमारी वर्मी कम्पोस्ट खरीद ले जाते हैं। इसके अलावा आस-पास के बाजारों और पड़ोस के बहराइच व गोंडा जिलों में ट्राली में भरकर वर्मी कम्पोस्ट भेजते हैं।''

कुसमा के मुताबिक उनके समूह को प्रति माह 30-35 हजार रुपये की आमदनी होती है। पिछले पांच सालों में उनके समूह की दो लाख रुपये से ज्यादा की बचत हो गई, जिसका उपयोग वे अपने व्यवसाय के विस्तार में लगाती हैं।

शांति और कुसमा के समूह से प्रेरित होकर 3,000 की आबादी वाले रामपुर पैड़ा गांव की 250 से ज्यादा महिलाएं आज अलग-अलग समूह बनाकर वर्मी कम्पोस्ट बनाने व काम के जरिये अपने जीवन में खुशहाली ला रही हैं।

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