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मनी लाण्ड्रिंग में भी फंसेंगे माननीय

विशेष संवाददाता लखनऊ। एनआरएचएम घोटाले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे कई माननीय सीबीआई जांच के घेरे में आते जा रहे हैं। सीबीआई अब इन माननीयों को विभिन्न फर्मो के जरिये हुए भुगतान की खासतौर पर पड़ताल में जुटी है, ताकि करोड़ों के लेन-देन का खुलासा किया जा सके। सीबीआई का मानना है कि नकद में निकाली गई करोड़ों की रकम माननीयों के गुरगों के जरिये उन तक पहुंची और फिर इसे सफेद कमाई के रूप में निवेश किया गया।

ऐसे में अब सीबीआई मनी लाण्ड्रिंग एक्ट के तहत भी साक्ष्य जुटाने में लगी है। एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई को प्रमाण मिले हैं कि पैक्सफैड, जल निगम और यूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड के जरिये एनआरएचएम में कराए गए निर्माण कार्य और दवा सप्लाई के मामलों में कई फर्मो को भुगतान हुए। इन फर्मो के खातों से लाखों की रकम कई-कई बार में नगद निकाली गई।

बाबू सिंह कुशवाला के करीबी एक बसपा नेता के करीबियों ने एक फर्म के खाते से 54 लाख रुपए से ज्यादा निकाले हैं। इसी तरह कई अन्य फर्मो से भी कभी 10 लाख रुपए तो कभी 5 लाख रुपए नकद निकालने के प्रमाण मिले हैं। सीबीआई अब बैंक खातों से इन नकद निकासी की गहन छानबीन में जुटी है। सीबीआई अधिकारियों का मानना है कि तीस लाख से ज्यादा की रकम निकासी के मामले में मनी लाण्ड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में सीबीआई अब बड़े नेताओं को मनी लाण्ड्रिंग एक्ट के तहत घेरने की तैयारी कर रही है।

नकदी के स्रेत और उसे खपाने के बारे में पड़ताल हो रही है, ताकि घोटाले की रकम कहां तक गई और किसे फायदा पहुंचाया गया, इसके साक्ष्य जुटाए जा सकें। अगर जरूरी हुआ तो सीबीआई इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों की भी मदद लेने पर विचार कर रही है।

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