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धान के सवाल पर बवाल

पटना (हि.ब्यू.)। धान का सवाल विधानसभा में बवाल की वजह बन गया। गुरुवार को सदन में भारी शोर-शराबे और विपक्ष के वाकआउट के बीच सत्ता पक्ष के सदस्यों ने तारांकित प्रश्न और ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से कई बार इस मामले को उठाया। सबकी पीड़ा यही कि धान के रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद किसान बेहाल हैं।

खाद्य मंत्री श्याम रजक ने शुक्रवार से राज्यव्यापी सरकारी खरीद का भरोसा दिलाया लेकिन सदस्य नहीं माने। तब विधानसभाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने कार्रवाई का निर्देश देकर उन्हें शांत कराया। सरकार ने जिलों के प्रभारी प्रधान सचिवों को अपने-अपने क्षेत्र में पहुंच जाने का निर्देश दिया है। सदन में सुबोध राय ने सबसे पहले यह मुद्दा उठाया।

साथ में अजीत कुमार, नीरज बबलू और राजेश्वर राज उठ खड़े हुए। उनका कहना था कि सरकार ने पांच हजार क्रय केन्द्र खोलने की घोषणा की लेकिन अबतक धान की खरीद शुरू नहीं हुई। इसी बीच राजद, कांग्रेस, लोजपा के सदस्य भी नारेबाजी करने लगे। शोर-शराबे के बीच मंत्री ने कहा कि 9 दिसम्बर से पूरे राज्य में धान की सरकार खरीद शुरू होगी।

सभी जिलों के प्रभारी प्रधान सचिवों को अभियान की कमान सौंपी गयी है। डिप्टी कलेक्टर तैनात किये गये हैं। खरीद केन्द्रों पर धन की कमी न हो, इसके लिए राज्य कॉपरेटिव बैंक को मिले 800 करोड़ रुपये दिये गये हैं। राज्य में 4769 पैक्सों और एफसीआई के 90 क्रय केन्द्रों के माध्यम से खरीद होगी।

जिन पंचायतों में पैक्सों द्वारा खरीद नहीं होगी वहां राज्य खाद्य निगम दो-दो क्रय केन्द्र खोलेगा। मंत्री ने कहा कि धान में 17 प्रतिशत तक नमी होने पर ही खरीद होती है लेकिन अभी नमी का स्तर 30 प्रतिशत तक है। इसलिए थोड़ी परेशानी है।

उनके जवाब के बाद भी नारेबाजी नहीं थमी तो संसदीय कार्य मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव ने भी समझाने की कोशिश की लेकिन विपक्षी सदस्य वाकआउट कर गये। बाद में आनंदी प्रसाद यादव, अशोक कुमार सिंह, परमानन्द ऋषिदेव, महेश पासवान और ज्ञानचन्द मांझी ने ध्यानकर्षण सूचना के माध्यम से इसी मुद्दे को उठाया।

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