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बाल श्रमिकों के हाथ में हथौड़ा नहीं कंधे पर होगा

 तृप्त चौबे मिर्जापुर। पत्थर की खदानों में काम करने वाले बाल श्रमिकों के हाथों में हथौड़ा नहीं अब उनके कंधों पर स्कूली बैग होगा। होटलों, ढाबों, कालीन उद्योग, खेतों और घरों में काम करने वाले बाल श्रमिक भी अब पढ़ लिख सकेंगे।

भारत सरकार के श्रम मंत्रालय की राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के तहत इन बच्चों के लिए विशेष विद्यालय खोले जाएंगे। यह योजना पूर्वाचल के सभी जनपदों में प्रभावी है। अकेले मिर्जापुर में बारह सौ से अधिक बाल श्रमिकों को चिह्न्ति कर उनकी सूची तैयार की जा चुकी है।

राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के परियोजनाधिकारी की जिम्मेदारी जिला बचत अधिकारी विजय कुमार को सौंपी गयी है। उनके अनुसार श्रम मंत्रालय द्वारा तीन महीने पहले ही छह से चौदह वर्ष के बच्चों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया। मंत्रालय के निर्देशानुसार जिलाधिकारी के स्तर से बच्चों की सूची तैयार करने के लिए बाल विकास विभाग की मदद ली गयी।

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं और सुपरवाइजरों के माध्यम से बच्चों की सूची तैयार करायी गयी। मंत्रालय की गाइड लाइन के अनुसार उन बच्चों को भी शामिल किया गया है जो पढ़ने के बजाय अपने ही घरों में मेहनत करते हैं। उन्होंने बताया कि बाल श्रमिकों के चयन के बाद हर पचास बच्चों की संख्या पर एक प्राथमिक विद्यालय खोला जाएगा। इसमें पढ़ने वाले बाल श्रमिक को डेढ़ सौ रुपये मासिक के तौर पर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

प्राईमरी के बच्चों की तरह बाल श्रमिक छात्रों को भी मध्याह्न् भोजन और मुफ्त में पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध होंगी। परियोजना के मानक के अनुरुप शुरू में ये विद्यालय किराए के भवनों में संचालित होंगे। योजना के सफल होने पर भविष्य में विद्यालयों के भवन का निर्माण होगा। प्राथमिक कक्षाओं की शिक्षा के बाद बच्चों को पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में दाखिला दिलाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि यह योजना पूर्वाचल के सभी जनपदों में प्रभावी है। जिले में सर्वे का कार्य लगभग पूर्ण हो गया है। सिटी और लालगंज ब्लाक की रिपोर्ट आनी बाकी है। शेष दस ब्लाकों की सर्वे सूची विभाग को मिल गई है। उनका डाटा फिडिंग कराया जा रहा है।

इस तरह से जिले में कुल बाल श्रमिकों की संख्या बारह सौ से कुछ अधिक होगी। पूर्वाचल भर में इस संख्या के बीस हजार के पार होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि सब-कुछ ठीक रहा तो दिसंबर के आखिर तक विद्यालयों का संचालन शुरू हो जाएगा। इनसेट कैसे हुआ है श्रमिकों का सर्वे मिर्जापुर। पांच पन्नों वाले प्रपत्र पर बाल श्रमिकों का पूरा ब्यौरा तैयार कराया गया है। इसमें बच्चों का नाम, उनकी उम्र, पिता का नाम, पता, श्रम का प्रकार, कब स्कूल जाने के इच्छुक हैं,अभिभावक किस कार्य में लगे हैं, अभिभावकों की मासिक आय, बाहर कितने घंटे कार्य करता है आदि का विवरण भरा गया है। पूर्व में भी चली थी योजना मिर्जापुर।

राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना पूर्व के वर्षो में भी चली थी लेकिन बहुत सी कमियों के कारण यह सफल नहीं हो पायी थी। वर्ष 2005 में सोलह और 2008 में जिले में चार विद्यालय चले थे। पिछले तीन वर्ष से योजना को ठप कर दिया गया था। श्रम मंत्रालय ने बाल श्रमिकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए योजना में सुधार करके इसे फिर से प्रभावी कर दिया है। राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना का सबसे अधिक लाभ गरीबी के कारण बचपन में ही हाड़तोड़ मेहनत के लिए विवश होने वाले परिवारों के बच्चों को मिलेगा। योजना की खासियत यह है कि स्कूलों में बच्चों द्वारा निर्धारित किए गए समय के अनुसार पढ़ाई होगी। विद्यालय चलाने वालों को मंत्रालय की ओर से हर संभव सुविधा प्रदान की जाएगी। विजय कुमार जिला बचत अधिकारी/ राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजनाधिकारी, मिर्जापुर

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