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महंगाई पर सदन में सत्ता-विपक्ष में रही खींचतान

ताबड़तोड़ बढ़ती महंगाई पर घमासान के बाद आखिरकार सदन में चर्चा हुई, लेकिन कोई नतीजा निकालने के बजाय सत्तापक्ष और विपक्ष इस मसले पर एक-दूसरे की खिंचाई ही करते रहे।

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने करीब 45 मिनट के भाषण में आंकड़ों का बखूबी इस्तेमाल किया। उन्होंने ने सरकार की गलत नीतियों और भ्रष्टाचार को महंगाई के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अगर यूपीए महंगाई नहीं रोक सकती तो गद्दी छोड़ दे।

इसके अलावा, सरकार यदि विदेशों में जमा काला धन वापस ले आए और सरकारी खजाने की लूट रोक दे तो महंगाई पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने पूछा कि क्या शहरों में 32 रुपये और गांव में 26 रुपये खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब नहीं है? उन्होंने परोक्ष रूप से प्रधानमंत्री और मोंटेक सिंह अहलूवालिया पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इस देश की समस्याओं को हार्वर्ड और ऑक्सफोर्ड वाले नहीं समझ सकते।

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार के उपाय के चलते ही बीते दो वर्षों में जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम घटे या मामूली वृद्धि हुई। हकीकत में एनडीए के कार्यकाल में लोग महंगाई से त्रस्त थे। मंहगाई उतनी नहीं बढ़ी है जितना विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर उछाल रहा है। सरकार के पास 74 बाजारों के भाव हैं जिनमें 30 ऐसे हैं जिनके भाव दो साल में कम हुए हैं या मामूली वृद्धि हुई है।

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