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दिल्ली एयरपोर्ट पर फंसा हुआ है एक कुत्ता

आस्ट्रेलिया से आया ग्रे हाउंड प्रजाति का एक कुत्ता दिल्ली एयरपोर्ट पर 20 गज के एक बदबूदार कबाड़खाने में 40 दिन से भूखा पड़ा हुआ है। वह धीरे-धीरे मौत के मुंह में जा रहा है। ऐस नाम के इस कुत्ते का कोई जुर्म नहीं है। इस मामले में अगर किसी का जुर्म बनता है तो वह उसे अपना बेहतरीन दोस्त कहने वाले इनसान या उसकी बनाई गई तथाकथित व्यवस्था का।

कुत्तों की रेस में अच्छे-अच्छों को पछाड़ने वाले ऐस की मौत की रेस शुरू हुई उसको भारत भेजने से। उसे आस्ट्रेलियाई मालिक जगमीत सिंह सिंधु ने करीब 80 हजार रुपये में ऐस को भारत भिजवाया अपने घर के लिए। फिर क्या था उसे विमान से 1 नंवबर को भारत भेज दिया गया। लेकिन ऐस के दिल्ली एयरपोर्ट से बाहर आने का मामला कागजी प्रक्रिया और भ्रष्टाचार में फंस गया। यहां के कार्गो टर्मिनल में तब से यह कुत्ता बाहर निकलने का इंतजार कर रहा है। लेकिन उसके नए मालिक का कहना है कि जो कुछ उनके साथ बीती, इसके चलते वह इस कुत्ते को बाहर नहीं निकाल सकते।

सूत्रों ने इसकी जो वजह बताई, वह हमारे देश के लोगों को बिल्कुल नहीं चौंकाएगी। कहा जा रहा है कि कुत्ते के मालिक से एक पशु चिकित्सक ने रिश्वत मांगी। उसने इस कुत्ते की एनओसी देने के लिए जितनी रकम मांगी, उसे देखते हुए मालिक ने उसे यहां से न निकालना बेहतर माना। इस कुत्ते के सौदे में शामिल कंपनी सेलेबी भी अब अपनी जिम्मेदारी से हटती लग रही है। वह इस कुत्ते को खाना नहीं दे पा रही। नतीजतन वह महीनेभर से भूखा है।

तो नरक है हर तरफ
जहां ऐस रह रहा है वहां बदबू है और रददी पड़ी है। कुत्ता वहीं टायलेट करता है और वहीं सोता है। कोई वहां साफ-सफाई नहीं करता। इतना ही नहीं उसे पीने के लिए जो पानी मिलता है वह भी गंदा है।

क्या है विकल्प..मार देना ?
1- इस कुत्ते के मालिक ने इसे लेने से मना कर दिया है। लिहाजा यह सभी संस्थानों के लिए बोझ बन गया है। क्योंकि कोई न तो इसके लालन-पालन करना चाहता है, न तो उसे वापस आस्ट्रेलिया भेजा सकता है। इसलिए उसे मारने का विचार किया जा रहा है।

..या फिर जिंदगी देना?
1. थोड़ी सी इच्छा शक्ति, मानवीयता दिखाई जाए तो कुत्ता बच सकता है। सबसे पहले उसको भरपेट खाना देना होगा। फिर इलाज करना पड़ेगा। इससे वह आम कुत्तों जितना स्वस्थ हो जाएगा। यह काम कर सकते हैं इसके सौदे से जुड़ी कंपनी या कोई पशुपालन संस्था।
2. एक और अच्छा संकेत है। कार्गो टर्मिनल पर काम कर रहे कई अधिकारी और कर्मचारी इसे अपने घर ले जाने को तैयार हैं।
3. एक और तरीका है कि इसे किसी एनजीओ को दे दिया जाए जो इसे अपने पास रख ले।
4. इसे किसी ऐसे व्यक्ति को दे दिया जाए जो इसे एडॉप्ट करने को तैयार हो।

रेस जीतकर आ चुका है कुत्ता
आस्ट्रेलिया में यह कुत्ता कई रेस जीत चुका है। अहम बात यह है कि इस कुत्ते की नस्ल रेस के लिए ही बनी है। अमरिका हो या आयरलैंड सभी जगह इस नस्ल के कुत्ताें की रेस होती है।

ग्रे हाउंड प्रजाति के कुत्ते
गति
इस ब्रीड के कुत्ते रफ्तार के लिए ही बने हैं। इनके दौड़ने की गति औसतन 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा है।
वजन
यह कुत्ते कम वजनी होते हैं। यह 27 से 40 किलोग्राम तक के हो सकते हैं। इनकी लंबाई 71 से 76 सेंटीमीटर होती है।
वफादार और शांत
इस नस्ल के कुत्ते वफादार, शांत और ताकतवर होते हैं। यह भौंकने वाले कुत्ते नहीं होते। ये 12 साल से 14 साल तक जीते हैं।
कीमत
आमतौर पर ग्रे हाउंड कुत्ते की भारत में कीमत दस हजार से पचास हजार का हो सकती है। लेकिन जानकार बताते हैं कि अगर कोई कुत्ता विदेश में रेस जीता हुआ हो तो उसकी कीमत लाखों तक पहुंचती है।

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