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मुआवजे मामले में खटखटाया कानून विभाग का दरवाजा

नंद नगरी हादसे में मारे गए किन्नरों को मुआवजा देने के मामले में दिल्ली सरकार फंस गई है। किन्नरों की मौत के बाद यह तय नहीं हो पा रहा है कि इस हादसे में मारे गए किन्नरों का मुआवजा किसे दिया जाए। किन्नर के गुरू ही इन लोगों का भरण पोषण करते है और इनके अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति ने इस मुआवजे के लिए गुहार नहीं लगाई है। प्रावधान के मुताबिक गुरूओं को यह मुआवजा नहीं मिल सकता। अब इस मामले में उलङी हुई सरकार ने यह मामला कानून विभाग के सुपुर्द कर दिया है और इस गंभीर मसले पर मशविरा मांगा है।

इस सलाह के बाद ही मुआवजा बांटने की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। नंदनगरी में देश भर के किन्नर समारोह के दौरान आगजनी की दुर्घटना के दौरान कई किन्नरों की मौत हो गई थी। दिल्ली सरकार ने हादसे के बाद मरने वालों को 2 लाख रुपये व घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि दिए जाने का ऐलान किया था। घायलों को मुआवजा बांटे जाने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है लेकिन मृतकों का मामला अभी तक फंसा हुआ है। वहीं प्रशासन इस मामले की रिपोर्ट तैयार करने में जुटा हुआ है।

सूत्रों ने बताया कि इस मामले में सभी गवाहों व संबंधित लोगों को ब्यान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जल्द ही इसकी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को पेश की जाएगी। किन्नर समाज के लिए यह सामाजिक कार्यक्रम था और जब समाज में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित होते हैं तो टैंट आदि के लिए अनुमति नहीं ली जाती। यह कार्यक्रम 21 नवम्बर से 3 दिसम्बर तक के लिए तय था और इसमें हर राज्य से आने वाले लोगों के लिए अलग दिन तय था। यही वजह थी कि जिस दिन यह हादसा हुआ उस दिन बंगाल, उड़ीसा व मध्यप्रदेश से आए किन्नर सबसे अधिक थे। यह एक गोपनीय कार्यक्रम था इसलिए भी प्रशासन को जांच में काफी दिक्कतें आ रही हैं।

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  • Web Title: मुआवजे मामले में खटखटाया कानून विभाग का दरवाजा