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कानून बनने पर भी घरेलू हिंसा में बढोत्तरी

घरेलू हिंसा निरोधक कानून लागू होने के बावजूद पतियों एवं रिश्तेदारों द्वारा पत्नियों तथा महिलाओं के खिलाफ हिंसा में गत वर्ष में बढोत्तरी हुई है।

इसके अलावा तीन साल में दहेज के मामलों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है। यह जानकारी केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा तीरथ ने गुरुवार को यहां राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
 
श्रीमती तीरथ ने बताया कि वर्ष 2008 में भारतीय दंड संहिता की धारा 304 बी के तहत दहेज हत्या के संबंध में 8172 वर्ष 2009 में 8383 तथा 2010 में 8391 मामले दर्ज किए गए जबकि पतियों एवं रिश्तेदारों द्वारा घरेलू हिंसा के संबंध में वर्ष 2008 में 81344, 2009 में 89546 तथा 2010 में 94041 मामले दर्ज किए गए।
 
उन्होंने बताया कि दहेज हत्या के संबंध में सर्वाधिक मामले उत्तर प्रदेश तथा बिहार में दर्ज किए गए जबकि घरेलू हिंसा के मामले में सर्वाधिक मामले पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश तथा राजस्थान में दर्ज किए गए।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि दहेज हत्या निरोधक कानून 1961 के तहत 2006 में 27.3 प्रतिशत 2007 में 23.9 प्रतिशत 2008 में 23.5 प्रतिशत, 2009 में 21.5 प्रतिशत तथा 2010 में 23.3 प्रतिशत मामलों में सजाएं हुई।

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