DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

माइग्रेन: आप हैं आसान शिकार

ज्यादा थकावट तो सिर दर्द, ठंड बढ़ गई तो सिर दर्द। पर अगर यही सिर दर्द लगातार हो तो सतर्क हो जाएं, क्योंकि यह माइग्रेन का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है। विभिन्न शोधों से यह बात सामने आई है कि महिलाएं माइग्रेन की शिकार ज्यादा होती हैं। आईए जाने इस बीमारी के कारण और उपचार।

सबसे आम एक बीमारी का नाम अगर आपको बताने के लिए कहा जाए तो सबसे पहले आपके दिमाग में भी शायद सिर दर्द का ही नाम आए। तेज रफ्तार जिंदगी के कारण आज सिरदर्द की समस्या आम हो गई है। लंबे समय तक चलने वाला सिरदर्द आगे चल कर माइग्रेन का रूप धारण कर लेता है। माइग्रेन का दर्द कुछ घंटे से लेकर कई दिनों तक रह सकता है। माइग्रेन भी एक लंबे समय तक चलने वाला सिरदर्द ही है।

क्षमता से अधिक काम, नींद की कमी, समय पर खाना न खाना, शराब का सेवन आदि के कारण आप माइग्रेन का आसान शिकार बन सकती हैं। अपोलो अस्पताल के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अनूप कोहली कहते हैं कि माइग्रेन में तेज सिरदर्द के साथ चक्कर आना, जी मिचलाना, रोशनी और आवाजों के प्रति संवेदनशीलता जैसे लक्षण भी पाए जा सकते हैं। कई लोगों में मस्तिष्क के एक भाग में धुकधुक की आवाज के साथ तेज दर्द होता है।

माइग्रेन के दो प्रकारों को क्लासिकल माइग्रेन और नॉन क्लासिकल माइग्रेन कहा जाता है। जब माइग्रेन का दर्द ‘ऑरा’(दृष्टि संबंधी गड़बड़ी) के बाद शुरू होता है, तब इसे क्लासिकल माइग्रेन कहते हैं। जिन लोगों में यह ‘ऑरा’ के साथ शुरू होता है, उनमें आमतौर पर सिरदर्द के 10-15 मिनट पहले ‘ऑरा’ के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। जब माइग्रेन का दर्द बिना ‘ऑरा’ और दूसरे लक्षणों के साथ शुरू होता है, तब इसे नॉन क्लासिकल माइग्रेन कहते हैं।

माइग्रेन के कारण
वैसे तो माइग्रेन के वास्तविक कारणों का पता नहीं है। अक्सर देखा गया है कि माइग्रेन एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित होता है। 50 प्रतिशत मामलों में देखा गया है कि जो व्यक्ति माइग्रेन से पीड़ित है, उसके परिवार में, यहां तक कि रिश्तेदारों में भी इसकी आशंका बढ़ जाती है। मनोवैज्ञानिक समस्याएं जैसे उत्तेजना और गहरा अवसाद या न्यूरॉटिक डिसआर्डर जैसे पक्षाघात और मिरगी माइग्रेन के खतरे को  बढ़ा देते हैं। कई खाने-पीने की चीजें माइग्रेन के लिए ट्रिगर का काम करती हैं, विशेषकर बीयर, रेड वाइन, चॉकलेट और कैफीन की लत भी माइग्रेन का शिकार बना सकती है। वातावरण में बदलाव जैसे तापमान में अचानक बढ़ोतरी, वायुदाब में कमी भी माइग्रेन की समस्या बढ़ा सकती है। शरीरिक क्षमता से अधिक कार्य या एक्सरसाइज करना, न सोना या देर से सोना या बहुत ज्यादा सोने से भी माइग्रेन की आशंका बढ़ती है। तेज रोशनी, शोर, परफ्यूम और इत्र की तेज गंध आदि से माइग्रेन की समस्या बढ़ जाती है।

क्या है उपचार
माइग्रेन का कोई स्थायी उपचार उपलब्ध नहीं है, पर कई दवाइयों से इसकी तीव्रता कम की जा सकती है। माइग्रेन का उपचार माइग्रेन मैनेजमेंट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें प्रिवेंटिव ड्रग्स, माइग्रेन सजर्री, पोषक तत्वों का सेवन, जीवन शैली और इसके ट्रिगर से बचाव शामिल है। आयुर्वेदिक कंसल्टेंट डॉ. नीरू जैन कहती हैं, ‘स्पा माइग्रेन का उपचार नहीं करता, पर ‘शिरोधारा’ एक स्पा थेरेपी है, जो माइग्रेन को नियंत्रित रखने में मदद करती है। ’

क्या आप भी हैं माइग्रेन की शिकार?
माइग्रेन से पीड़ित कई लोगों को वास्तविक दर्द शुरू होने से पहले ही उसके लक्षण महसूस होने लगते हैं। इन लक्षणों में दृष्टि संबंधी गड़बड़ी यानी ‘ऑरा’ प्रमुख है। इसके अलावा माइग्रेन के शिकार लोगों को धुंधला दिखाई देता है। वे रोशनी और आवाजों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं, उन्हें आड़ी-तिरछी लाइनें नजर आती हैं, मस्तिष्क के आधे भाग में तेज दर्द होता है, किसी एक चीज पर वो अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते, बात करते समय कभी-कभार वो उपयुक्त शब्द की तलाश नहीं कर पाते, उनकी सोचने की क्षमता प्रभावित हो जाती है और मानसिक थकावट भी महसूस करते हैं।

महिलाएं हैं आसान शिकार
बचपन में सिरदर्द लड़कियों की तुलना में लड़कों में अधिक होता है, लेकिन किशोरावस्था में पहुंचते ही लड़कियों में सिर दर्द की समस्या लड़कों के मुकाबले ज्यादा होती है। महिलाओं में माइग्रेन की समस्या भी पुरुषों के मुकाबले तीन गुना ज्यादा होती है। उम्र के साथ यह समस्या बढ़ती जाती है। महिलाओं में हार्मोन परिवर्तन और माइग्रेन में गहरा संबंध है। पीरियड्स के समय माइग्रेन की आशंका बढ़ जाती है, क्योंकि इस समय एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है। प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज किसी स्त्री के जीवन की दो अन्य अवस्थाएं हैं, जब हार्मोन परिवर्तन होते हैं। इस दौरान भी माइग्रेन की आशंका बढ़ जाती है।

कई महिलाओं में प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीनों में माइग्रेन की समस्या बढ़ जाती है, फिर धीरे-धीरे कम हो जाती है तो कई महिलाओं में मेनोपॉज के बाद माइग्रेन का अटैक काफी कम हो जाता है। कई रिसर्च  में यह बात उभर कर आई है कि गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन माइग्रेन के खतरे को बढ़ा देता है। जिन महिलाओं में इन गोलियों के सेवन से स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं, उन्हें परिवार नियोजन के दूसरे उपाय सुझाए जाते हैं।  

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:माइग्रेन: आप हैं आसान शिकार