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लोकपाल के मसौदे पर कांग्रेस मे मचा घमासान

लोकपाल विधेयक के मसौदे को संसद की स्थायी समिति ने मंजूर कर लिया है। बुधवार को समिति की आखिरी बैठक हुई। समिति ने प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में रखने या न रखने का फैसला संसद के विवेक पर छोड़ दिया है।

विधेयक के मसौदे में ग्रुप सी के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं किया गया है। समिति के इस फैसले से कई सदस्यों में नाराजगी है। इनमें से तीन कांग्रेस के हैं। इन्होंने इस मामले में अपनी नाराजगी का इजहार असहमति पत्र देकर किया है।

लोकपाल समिति राज्यसभा की समिति थी इसलिए इसकी रिपोर्ट शुक्रवार को पहले राज्यसभा के सभापति को सौंपे जाने के संकेत हैं। 19 या 20 तारीख को इसे लोकसभा में पेश किया जा सकता है। यह बिल मौजूदा संसद सत्र में पास हो सकता है। अगर 9 दिसंबर को यह संसद में रखा जाता है तो सरकारी संशोधनों के साथ ताजा ड्राफ्ट लोकसभा में 19 दिसंबर को आ सकता है और उसके बाद 21 दिसंबर को राज्यसभा में आ सकता है। मौजूदा शीत सत्र 22 दिसंबर तक चलेगा।

सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने के मामले में मसौदे में तीन विकल्प सुझाए गए हैं। पहला , प्रधानमंत्री को बिना किसी शर्त या अपवाद के इसके दायरे में ले लिया जाए। दूसरा, पद छोड़ने के बाद उसे बिना किसी शर्त के इसके दायरे में रखा जाए या फिर रक्षा और विदेश जैसे कुछ मामलों को छोड़कर अन्य मामलों में वह लोकपाल के दायरे में हो।

लोकपाल विधेयक के ड्राफ्ट के विरोध में 30 सदस्यों वाली इस कमिटी को सदस्यों के 16 असहमति पत्र मिले हैं। इनमें बीजेपी, लेफ्ट, आरजेडी, एलजेपी, एसपी, बीजेडी, कांग्रेस हैं। बीजेपी, लेफ्ट पार्टियों और बीजेडी के सदस्यों ने प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में न लाने के मामले के साथ ही विभिन्न मुद्दों पर असहमति जताते हुए समिति के अध्यक्ष को पत्र सौंपे हैं। टीम अन्ना के सुर में सुर मिलाते हुए स्टैंडिंग कमेटी के तीन कांग्रेसी सदस्यों पी टी थॉमस, मीनाक्षी नटराजन और दीपा दासमुंशी ने पार्टी के रुख के उलट सिफारिश की है कि ग्रुप सी के कर्मचारियों को भी लोकपाल के दायरे में लाया जाए। इन तीनों सदस्यों ने लोकपाल की सिफारिश के साथ अपनी आपत्ति नत्थी की है।

इससे स्टैंडिंग कमिटी के ड्राफ्ट के विरोध में विपक्ष के 12 सदस्यों के साथ तीन कांग्रेसियों का विरोध भी शामिल हो गया है। कांग्रेसी सदस्यों ने असहमति पत्र पेश करते हुए समूह सी को लोकपाल के दायरे में शामिल करने और सीवीसी को इसके प्रति जवाबदेह बनाने की मांग की है। फाइनल ड्राफ्ट में कहा गया है कि केंद्र के सी और डी कैटिगरी के अधिकारी सीवीसी के दायरे में होंगे। लोकपाल के दायरे में ग्रुप ए और बी कैटिगरी के अधिकारी रहेंगे। राज्य स्तर पर जो अधिकारी केंद्र के ग्रुप सी और डी कैटिगरी की बराबरी वाले हैं , उन्हें राज्य लोकायुक्त के दायरे में रखा जाएगा।

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