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संस्कृत एकांकी देख अभिभूत हुए महामहिम संवाद से संदेश संपूर्णानंद संस्कृत विवि

फोटो एससी 33वाराणसी। कार्यालय संवाददाता सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह की पूर्व संध्या पर संस्कृत एकांकी ‘यौत्कम’ में छात्र-छात्राओं की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति ने गर्वनर बीएल जोशी को अभिभूत कर दिया। विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में डेढ़ घंटे बैठकर उन्होंने बड़ी तन्मयता के साथ नाटक देखा और बीच-बीच में कई बार तालियां भी बजाईं। दीक्षांत समारोह में पन्द्रह साल बाद संस्कृत नाटक का मंचन हो रहा है।दहेज जैसी समाजिक अभिशाप को दर्शाने वाली इस प्रसुतति में एक परिवार की मानसिक दशा का रेखांकन किया गया। प्रथम तीन दृश्य में विषयवस्तु दुखात्मक रही। चौथे दृश्य में अद्भुत रस की योजना करके एकांकी को सुखांत बनाया गया। प्रो.शिवजी उपाध्याय की इस एकांकी में कन्या के पिता के रूप में केशव पोखरेल, लड़के के पिता के रूप में जगदीश तिवारी, घटक की भूमिका निभा रहे श्रीनाथधर द्विवेदी, कन्या की भूमिका में सुजाता पटेल और माता की भूमिका विजय लक्ष्मी पांडेय की भूमिका काफी दमदार रही। निर्देशन डॉ. हरिप्रसाद अधिकारी ने किया। एकांकी की समाप्ति पर राज्यपाल ने कहा कि दहेज एक ऐसा दानव है जो कई जीवनलीलाओं को असमय समाप्त कर दे रहा है। शादी से पहले और शादी के बाद लड़कियों को इस समस्या से गुजरना पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस एकांकी का मंचन विभिन्न जगहों पर होना चाहिये, ताकि लोग इससे प्रेरित हो सकें। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वह इस बुराई के खिलाफ आगे आएं। राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान सामाजिक परिवेश में लड़कियों का आगे आना संभव नहीं है। लड़कों को पहल करनी पड़ेगी। इस मौके पर कुलपति प्रो. बिंदा प्रसाद मिश्र, प्रो.सत्यव्रत शास्त्री, कुलसचिव डॉ. रजनीश शुक्ल सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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