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लोकायुक्त समेत 5 विधेयक विधानसभा से पारित

पटना। हिन्दुस्तान ब्यूरो। बिहार विधानसभा ने बुधवार को बिहार लोकायुक्त विधेयक, 2011 व बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त विधेयक, 2011 समेत पांच विधेयकों को पारित कर दिया। इसमें बिहार भूमि दाखिल-खारिज विधेयक, 2011 के अलावा बिहार राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2011 और पटना विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2011 भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक ओर सशक्त व पारदर्शी लोकायुक्त के गठन को लेकर सभी सदस्यों को आश्वस्त किया वहीं विपक्षी सदस्यों की तमाम आपत्तियों का भी जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने राज्य में जमीन समस्या के निपटारे के लिए तीन वर्षों के अंदर सर्वे और अगले पांच वर्षो में चकबंदी कराने की घोषणा की।

उन्होंने बताया कि सैटेलाइट से यह काम होगा और सभी जमीन का कम्प्यूटराइज्ड रिकार्ड होगा। उन्होंने दाखिल-खारिज के मामलों में होने वाली तमाम गड़बडिम्यों को भी दूर करने व इनके रिकार्ड को भी अद्यतन करने के लिए दाखिल-खारिज विधेयक को महत्वपूर्ण बताया। इसमें पहले की व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर किया गया है।

उधर शिक्षा मंत्री पी.के. शाही ने बताया कि विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक से विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक कार्यों को और दुरुस्त करने और शिक्षकों की नियुक्ति की बाधाओं को दूर करने में मदद मिलेगी। इससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्ता पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।0 बिहार लोकायुक्त विधेयक - बिहार लोकायुक्त अधिनियम, 1973 अनियमितताओं, भ्रष्टाचार एवं इसके लिए दोषी की पहचान एवं उसके नियंत्रण के लिए पर्याप्त नहीं है।

इसीलिए सक्षम लोकायुक्त संस्था का निर्माण, उनकी शक्तियों, कृत्यों एवं सभी श्रेणियों के लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की त्वरित जांच एवं अभियोजन की स्वीकृति के लिए सशक्त लोकायुक्त अधिनियम समय की मांग है। लोकायुक्त की चयन समिति में अब मुख्यमंत्री शामिल नहीं होंगे। पांच सदस्यीय चयन समिति की अध्यक्षता विधान परिषद के सभापित करेंगे। वे समिति के संयोजक होंगे।

चयन समिति में सभापति के अलावा विधानसभा अध्यक्ष, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा संस्तुत हाईकोर्ट के दो वरिष्ठ न्यायाधीश, पूर्ववर्ती लोकायुक्त सदस्य होंगे।0 बिहार भूमि सर्वे-बंदोबस्त एक्टइसका मकसद अल्प समय में अधिकार अभिलेखों का निर्माण करना एवं इसके अन्तर्गत कम्प्यूटरीकृत तथा डिजीटल व्यवस्था के तहत रिकार्ड तैयार करना व डिजीटल सिस्टम से नक्शा तैयार करना है। इसके तहत एक-एक इंच जमीन का रिकार्ड रखा जाएगा और समयबद्ध योजना के तहत सर्वे होगा। इसके लिए नीचे से ऊपर तक के कर्मचारियों व अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी। सैटेलाइट से सर्वे होगा और जमीन पर उसका मिलान किया जाएगा। सैटेलाइट सर्वे के आधार पर जमीन का नम्बर निर्धारित होगा। सूबे के संपूर्ण जमीन का तीन वर्ष में सर्वे और उसके अगले पांच वर्षो में चकबंदी की प्रक्रिया पूरी होगी।

वर्ष 1912 के बाद कई जिलों में सर्वे का काम नहीं, लिहाजा सैटेलाइट सर्वे की योजना।बिहार भूमि दाखिल-खारिज विधेयक, 20110 इसके तहत सभी भूधारियों को होल्डिंग का एक खाता मिलेगा। इस विधेयक का उद्देश्य विभिन्न तरीकों से हस्तांतरित भूमि के दाखिल-खारिज मामलों के त्वरित एवं पारदर्शी निष्पादन के लिए कानूनी उपबंध करना है। इससे अवांछित तत्वों से नाहक होने वाली परेशानी से छुटकारा मिलेगी और वे संरक्षित भी होंगे। इसमें अवैध रूप से खोली गयी जमाबंदियों को रद्द करने का मूल क्षेत्राधिकार अपर समाहर्ता का होगा। अपीलीय एवं पुनरीक्षण की जिम्मेदारी क्रमश: जिला के समाहर्ता एवं प्रमंडलीय आयुक्त को सौंपी गई है। नियमित दाखिल-खारिज न्यायालय एवं शिविर न्यायालय में दाखिल-खारिज मामलों के निपटारे की समय सीमा भी तय की गयी है। निपटारे में विलंब के लिए उत्तरदायित्व का निर्धारण भी किया गया है।  पटना विवि संशोधन विधेयक, 2011 व बिहार विवि संशोधन विधेयक, 2011- इसके तहत विश्वविद्यालय में कई रूपों में राज्य सरकार सकारात्मक दखल दे सकेगी। शिक्षकों की नियुक्ति कमेटी नहीं करेगी। शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आयोग का गठन होगा।

 

इसके अलावा कुलपतियों की नियुक्ति के लिए भी समिति के गठन का प्रावधान किया गया है। शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष की जगह 65 वर्ष होगी। राज्य सरकार का मानना है कि इससे विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक माहौल बेहतर होगा और शिक्षकों की कमी की समस्या दूर होगी। यही नहीं हर चीज समय पर हो सकेगी।

केन्द्र देखे हमारा विधेयक: नीतीश मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केन्द्र से अनुरोध किया है कि वह अपना लोकपाल विधेयक लाने के पहले बिहार के लोकायुक्त विधेयक को अवश्य देखे। उन्होंने कहा कि हमने लंबे मंथन और विमर्श के बाद इसे अंतिम रूप दिया है।

मौजूदा विधेयक सशक्त और पारदर्शी लोकायुक्त के गठन का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने सर्वे व बंदोबस्त विधेयक और दाखिल-खारिज विधेयक को भी वक्त की जरूरत बताया और कहा कि इससे राज्य के आम आदमी की परेशानी कम होगी। यही नहीं कई सुविधाएं भी उपलब्ध हो सकेंगी।

मुख्यमंत्री लोकायुक्त विधेयक पर एकदम स्पष्ट थे। उन्होंने कहा, ‘यह इसलिए भी जरूरी है ताकि जनता की सेवा करने वाली जमात बदनाम न हो। राजनीति की बिगड़ती-गिरती स्थिति व विश्वसनीयता बहाल हो सके। इससे लोकतंत्र मजबूत होगा।’ मुख्यमंत्री ने इस विषय पर न केवल सरकार का पक्ष रखा, बल्कि विपक्ष के संदेश और सवालों का भी विस्तार से उत्तर दिया।

उन्होंने कहा कि लोकायुक्त को लेकर सरकार बेहद गंभीर है और जो प्रावधान किए जा रहे हैं उसमें किसी के बच निकलने की कोई गुंजाइश नहीं है। कहीं किसी स्तर पर हस्तक्षेप नहीं है। समय सीमा में कार्रवाई होगी। पारदर्शिता इतनी है कि मुखिया से मुख्यमंत्री तक इसमें शामिल हैं। उनकी अपने स्वतंत्र जांच एजेंसी होगी और वे पूरी तरह स्वतंत्र हो काम कर सकेंगे।

जल्दबाजी में लाया लोकायुक्त विधेयक: विपक्ष विपक्ष ने लोकायुक्त के गठन पर हड़बड़ी दिखाने, सर्वे व बंदोबस्त विधेयक और दाखिल खारिज विधेयक से आम आदमी की परेशानी बढ़ने का आरोप लगाया। विपक्ष ने विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को वहां की स्वायत्तता पर हमला भी बताया और कहा कि इससे वहां शैक्षणिक माहौल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। विपक्ष के नेता अब्दुल बारी सिद्दिकी ने कहा कि तमाम आपत्तियों को देखते हुए इसे अगले सत्र में लाना चाहिए। इससे कमियां दूर हो सकेंगी। विपक्ष ने फरवरी 2012 तक सिर्फ आम आदमी से आपत्तियां मंगाने का भी सुझाव दिया।

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