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हादसे से बेफिक्र फर्राटे भरेंगे वाहन

दादरी। गाजियाबाद के लाल कुआं से लेकर अलीगढ़ तक बन रहा चार लेन का नेशनल हाइवे-91 कई मायनों में खास होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे इस तरह से डिजाइन किया जाएगा ताकि हादसों पर अंकुश लगाया जा सके। अभी इस सड़क पर होने वाले हादसों की वजह जानने के लिए केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) शोध कर रहा है। शोध में हाइवे के आसपास के वातावरण, प्रशासनिक मशीनरी, आपातकालीन सुविधा और अदालती कार्यवाही के आंकड़ों पर फोकस किया गया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) एनएच 91 पर होने वाले सड़क हादसों को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों वाली तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। इसके लिए एक शोध किया जा रहा है। जिसके तहत गाजियाबाद से अलीगढ़ तक पड़ने वाले थानों से सड़क हादसों की एफआईआर, मरने वालों और घायलों के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। शोध की जिम्मेदारी केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान को सौंपी गई है।

संस्थान के अधिकारी लाल कुआं (गाजियाबाद) और अलीगढ़ के बीच पड़ने वाले सभी थानों से 2007 से अब तक हुए हादसों की एफआईआए की कॉपी मांग रहे हैं। जिससे हादसों का समय, तारीख और कारण का पता लगाया जा सके। संस्थान के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी चरन सिंह ने बताया कि इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जाएगा कि हादसे किन स्थानों पर, किस समय और किसकी गलती से हुए। रोजाना हुए तीन हादसे

गाजियाबाद से अलीगढ़ तक हाइवे के क्षेत्र में नौ थाने पड़ते हैं। इनमें बादलपुर, दादरी, सिकंदराबाद, बुलंदशहर देहात, खुर्जा देहात, खुर्जा सिटी, अरनिया, गभाना, बराना शामिल हैं। इन थाना क्षेत्रों में इस साल अब तक हुए हादसों की जानकारी सीआरआरआई को मिल गई है। इस दौरान करीब 900 हादसे हुए हैं। इस हिसाब से औसतन रोजाना तीन दुर्घटनाएं होती हैं। जिसमें तीन हजार से ज्यादा लोग घायल हुए और करीब 600 लोगों ने जान गंवाई है।

---इन बिंदुओं पर खास जोरब्लैक स्पॉट- रोड पर अकसर एक ही स्थान पर सड़क हादसे होते हैं। एक मीटर के दायरे में हुए हादसों को आधार मानकर ब्लैक स्पॉट तय किए जाएंगे।डार्क साइट- रात के अंधेरे में कितने सड़क हादसे किन-किन स्थानों पर होते हैं। वहां देखा जाएगा कि किस कारण चालक को भ्रम होता है।ब्लैक साइट- ऐसे एरिया, जहां सबसे ज्यादा हादसे हुए हैं। जिसके बाद उस स्थान का विशेष रूप से सर्वेक्षण किया जाएगा।

------इन सुधारों से कम होंगे हादसेरेट ऑफ एक्सीडेंट को कम करने के लिए आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। पांच प्रमुख कारण ब्लैक स्पॉट, डार्क साइट या ब्लैक साइट के लिए जिम्मेदार हैं। हादसों की एफआईआर में इन तथ्यों का अध्ययन करके समाधान भी तलाश किया जाएगा।

एनवायरमेंट- इससे पता लगाया जाएगा कि पिछले पांच वर्षो में रोड पर कोहरे, धुंध या बारिश के कारण कितने एक्सीडेंट हुए हैं।इंजीनियरिंग- रोड को आसान और हादसों से बचाने के लिए किस तकनीक का प्रयोग किया जाए। सड़क का डिजाइन कैसा बनाया जाए।

एजुकेशन- पता लगाया जाएगा कि सड़क हादसों के लिए जिम्मेदार लोग कितने शिक्षित थे। मतलब, सड़क पर चलने वाले लोगों में शिक्षित और अशिक्षित होने का ड्राइविंग पर क्या फर्क पड़ता है।एनफोर्समेंट- पुलिस की सड़क हादसों में क्या भूमिका रही है।

पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके क्या किया है। अक्सर तेज रफ्तार और चालक की लापरवाही बताते हुए मुकदमा दर्ज किया जाता है लेकिन इसके अलावा भी कारण हो सकते हैं।एनपावरमेंट- कोर्ट में लंबित मामलों का पता लगाया जा रहा है। लोग सड़क हादसों के मामलों को हल्के में लेते हैं। सोचते हैं कि सड़क हादसा कोई बड़ा अपराध नही हैं। जिसकी बड़ी सजा भी नहीं है। ऐसे में लोग सड़क पर लापरवाही से चलते हैं।ं

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