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संवेदनहीन शिक्षितों के फौज की जरूरत नहीं: राज्यपाल

वाराणसी कार्यालय संवाददाता। प्रदेश के राज्यपाल व कुलाधिपति बीएल जोशी ने शिक्षा की सार्थकता का महत्व बताते हुए छात्रों से आह्वान किया कि विश्वविद्यालयों में इस प्रकार का शैक्षणिक ढांचा तैयार करना होगा जो भौतिक और सांस्कृतिक विकास के संतुलन को साध सके। ऐसी प्रतिभाओं को गढ़ना चाहिए जो राष्ट्र की भौतिक प्रगति के सूत्रधार बन सकें। हमें सूचनाओं के अम्बार से लदे संवेदनहीन शिक्षितों के फौज की जरूरत नहीं है। महामहिम राज्यपाल बुधवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में 33वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे।उन्होंने कहा कि छात्र दीक्षांत के साथ शिक्षा का अंत न समझे। जैसे-जैसे विकास की चुनौतियां सामने आ रहीं हैं, विश्वविद्यालयों को उनका सामना करने के लिये तैयार रहना चाहिए। शिक्षा सिर्फ जीविका के लिए नहीं, जीवन के लिए भी है। अच्छी शिक्षा सिर्फ पुस्तक पढ़ने से नहीं आती। विद्यार्थियों के बौद्धिक एवं नैतिक विकास के लिए शिक्षकों को भी अपने व्यवहार व चिंतन से खुद को उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करना होगा। मुख्य अतिथि सेबी के पूर्व चेयरमैन डीआर मेहता ने कहा कि देश को सशक्त लोकपाल की जरूरत है, लेकिन भ्रष्टाचार रोकने के लिए ऐसी व्यवस्था न बन जाए जिसमें लोग काम करने से ही परहेज करने लगे।

 

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के विरोध में जनचेतना जगी है। इस चेतना से अगर कोई नया कानून बनता है तो उससे भ्रष्टाचार पर अंकुश अवश्य लगेगा। लेकिन किसी भी युग में भ्रष्टाचार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। लोकपाल या लोकायुक्त को सनसनीखेज तरीके से काम नहीं करना चाहिये। ऐसा नहीं हुआ तो सरकार पंगु हो जायेगी। भ्रष्टाचार निरोध के साथ विकास ठप नहीं होना चाहिए। ‘मनरेगा’ जैसे कार्यक्रमों की प्रशंसा करते हुए श्री मेहता ने कहा कि जिन राज्यों में यह योजना ईमानदारी से लागू हुई वहां अच्छे परिणाम आये हैं। मनरेगा का क्रियान्वयन सही ढंग से होता है तो नक्सलवाद की समस्या का काफी हद तक समाधान हो जाएगा।

अतिथियों का स्वागत करते हुए कुलपति डॉ. पी नाग ने अपने सम्बोधन में विश्वविद्यालय की प्रगति का ब्योरा भी पेश किया। समारोह में कुलाधिपति ने विभिन्न विभागों के सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले 42 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल प्रदान किया। इस मौके पर दीक्षांत समारोह की स्मारिका का विमोचन भी किया गया। धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव साहब लाल मौर्य और संचालन प्रो.कल्पलता पांडेय ने किया। मौसम खराब होने के कारण राज्यपाल विलम्ब से वाराणसी पहुंचे। जिससे समारोह ढाई घंटे देर से शुरू हुआ।

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