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सिर्फ पुरोहित नहीं, अब संस्कृत के प्रोफेशनल्स

वाराणसी। वरिष्ठ संवाददाता। लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान पौरोहित्य, यज्ञ-अनुष्ठान और ज्योतिष के लिए बनारस में भी ट्रेनिंग कैम्प जल्द लगाएगा। संस्थान की ओर से यह पहल संस्कृत को बढ़ावा देने के साथ लोगों को रोजगार मुहैया कराने का प्रयास है। ताकि मैनेजमेंट, कम्प्यूटर साइंस आदि के दौर में सीमित दायरे में बंधी संस्कृत को नई पहचान मिले। इसके साथ ही संस्कृत का अध्ययन करने वालों को भी अन्य विधाओं के ‘प्रोफेशनल’ की तरह ही महत्व मिले। संस्थान की ओर से अब तक लगे शिविर गिने-चुने शहरों तक ही सीमित रहे हैं।

खास यह कि इनमें लोगों ने सर्वाधिक रुचि ज्योतिष विद्या सीखने में दिखायी है। महकमे के मुताबिक संस्कृत सम्भाषण, शुद्ध वेद पाठ के प्रत्येक कैम्प में अब तक जहां 60-70 लोगों की उपस्थिति रही। वहीं ज्योतिष और वास्तुशास्त्र के शिविर में 200 से अधिक युवाओं समेत नौकरीपेशा लोगों ने हिस्सेदारी की। संस्थान के अब तक लगे शिविर- संस्कृत सम्भाषण : लखनऊ, कानपुर, वृन्दावन, उरई- शुद्ध वेद पाठ : लखनऊ- ज्योतिष और वास्तुशास्त्र : लखनऊ- आयुर्वेद : लखनऊसंस्थान का बजट शिविर, कक्षा व उत्सव आदि के लिए सालाना बजट 30 लाख रुपये।कुल बजट से 15 लाख रुपये अखिल भारतीय व्यास महोत्सव के लिए।

प्रस्तावित ट्रेनिंग कैम्प के विषयकम्प्यूटर प्रशिक्षण के साथ संस्कृत लिपि शामिल करना, वैदिक विवाह पद्धति, उपनयन संस्कार, रुद्राभिषेक आदि।आगामी तैयारीविभिन्न शहरों में एक-एक माह के कैम्प।

शिविर में हिस्सेदारी के लिए उम्र का बंधन नहीं।वैदिक विवाह पद्धति की शॉर्टकट नहीं बल्कि पूरी जानकारी देंगे।दिक्कतेंपर्याप्त बजट के अभाव में पूर्व निर्धारित विषयों पर अन्य शहरों में शिविर नहीं लग पा रहे हैं। फलस्वरूप प्रस्तावित विषयों पर अमल में भी बाधा।उप्र संस्कृत संस्थान की अध्यक्ष डॉ. रेखा वाजपेयी ने संस्थान की इस पहल के बावत बताया कि लोगों में ऐसी मानसिकता बन गयी है कि संस्कृत भाषा में ‘कोई स्कोप नहीं है’।

अपनी लिपि होने के बावजूद उदासीनता के कारण इस भाषा को बढ़ावा नहीं मिल रहा है। सैकड़ों संस्कृत विद्यालय बंद हो चुके हैं। इन परिस्थितियों से संस्कृत भाषा को उबारने और लोगों में इसके प्रति रुचि जगाने के लिए बीते मई माह से ट्रेनिंग कैम्प शुरू किये गये हैं। विद्वानों की नगरी और संस्कृत भाषा के गढ़ वाराणसी में ऐसे शिविरों का आयोजन उत्साहजनक रहेगा।

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