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मसौदे के विरोध में तीन कांग्रेसी सांसद

लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार कर रही संसद की स्थायी समिति की आखिरी बैठक में सदस्यों के बीच बुधवार को फूट पड़ गई। समिति के 30 में से कांग्रेस के तीन सदस्यों समेत 16 ने मसौदे का विरोध किया है। इसके बावजूद विधि, न्याय, कार्मिक और जन शिकायत मामलों की संसदीय समिति की बैठक में बिल संबंधी रिपोर्ट को मंजूरी मिल गई। उधर, अन्ना हजारे ने भी निचली नौकरशाही को लोकायुक्त के दायरे में रखने के प्रस्ताव पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि पीएम को दायरे में लाने पर संसद का जो भी फैसला होगा, उन्हें मंजूर होगा।

रिपोर्ट में झूठी शिकायत पर दो वर्ष की बजाय न्यूनतम छह माह मामूली कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सिफारिश की गई है। यह प्रावधान बुरी नियत से शिकायत करने का दोष साबित होने के बाद ही लागू होगा। नौ दिसंबर को रिपोर्ट संसद पटल पर रखी जाएगी और जरूरी सिफारिशों के बाद 19 दिसंबर को संशोधित बिल फिर से संसद में पेश किया जाएगा। उधर, तीन कांग्रेसी सांसदों मीनाक्षी नटराजन, दीपादास मुंशी और पी. टी. थॉमस ने केंद्र सरकार के ग्रुप सी कार्मिकों को लोकपाल दायरे में नहीं रखने पर विरोध पत्र दिया है।

वहीं, प्रधानमंत्री को दायरे में नहीं रखने पर भाजपा, बीजद, सपा, लोजपा, राजद और वाम दलों के 13 सांसद पहले ही विरोध पत्र दे चुके हैं। लोजपा लोकपाल में आरक्षण की मांग भी कर रही है।

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