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भारतीयों की नजर में पढ़ाई-लिखाई से ही बदलेगा देश

अरब क्रांति इस साल दुनियाभर के लोगों के दिमाग में छाई रही। इसने सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव के लिए गुस्से से उबलते और हिंसा पर उतारू जनमानस की तस्वीर पेश की। इसमें दो राय नहीं कि दुनियाभर के लोगों में बदलाव की चाहत और इसके लिए कुछ करने की चाहत बढ़ी है। बात भारतीयों की हो तो वे भी चाहते हैं कि देश बदले पर इसके लिए वह पढ़ाई-लिखाई को ही सबसे कारगर हथियार मानते है।

अमेरिका की वालडेन यूनिवर्सिटी की तरफ से सामाजिक बदलाव के विषय पर कराए गए एक विश्वव्यापी ऑनलाइन सर्वे में 56 प्रतिशत भारतीयों ने शिक्षा को सबसे असरदार मुद्दा माना।

वैसे दुनियाभर के वयस्कों में शिक्षा को सकारात्मक सामाजिक बदलाव का रास्ता मानने वालों की संख्या सिर्फ 37 फीसदी रही। इस सर्वे में जो मूल बात उभरी वह है- वैश्विक सोच, स्थानीय असर। यानी विभिन्न देशों के 73% लोग मानते हैं कि दुनिया के किसी भी हिस्से में जो कुछ घटता है, उसका असर उनके स्थानीय समुदाय पर जरूर पड़ता है।

इस ऑनलाइन सर्वेक्षण में एक तथ्य यह भी पता चला कि सामाजिक बदलाव से जुड़े रहने की इच्छा। करीब 75 प्रतिशत लोग पिछले छह महीने के दौरान किसी न किसी तरह परिवर्तन की प्रक्रिया से सीधे जुड़े रहे हैं। इनमें पैसे दान करने से लेकर सामान या सेवा कार्यों में हिस्सेदारी तक शामिल है।

सर्वे में शामिल हरेक देश के औसत 66 प्रतिशत लोगों का मानना था कि अगले कुछ वर्षो में उनके देश और उनकी जिंदगी को अगर कोई सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा तो वह पर्यावरण ही होगा। विशेषकर मैक्सिको (83%) और ब्राजील (77%) में यह चिंता सबसे ज्यादा दिखाई दी।

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