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मुंह की स्वच्छता का खयाल रखना है जरूरी

संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए दांतों का स्वस्थ होना भी बेहद जरूरी है। दांत न केवल हमारे स्वास्थ्य को, बल्कि लुक को भी प्रभावित करते हैं, इसलिए मुंह में होने वाली किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करें। मुंह की समस्याओं से बचने के लिए सिर्फ ब्रश करना ही काफी नहीं होता। मुंह की स्वच्छता के लिए दांतों की नियमित जांच भी जरूरी है।

हाल ही में हुए कुछ सर्वेक्षणों से ये पता चला है कि मुंह की स्वच्छता का नाता हमारे पूर्ण स्वास्थ्य से होता है। आमतौर पर लोग मुंह की स्वच्छता का मतलब सिर्फ दांतों की सफाई, ताजा सांसों से ही लेते हैं, लेकिन इसका अर्थ है मुंह की अच्छी तरह से सफाई रखना। मुंह स्वच्छ न होने पर दांतों के आस-पास प्लाक व टारटर जमा होने लगता है, जो दांतों के लिए बेहद हानिकारक साबित होता है।

अगर मुंह में होने वाली समस्या का ध्यान न रखा जाए तो इसका असर पूरी सेहत पर पड़ता है। तभी तो कहा जाता है कि व्यक्ति की सेहत का खुलासा उसके दांतों से ही हो जाता है। अध्ययन बताते हैं कि मुंह की समस्या की वजह से स्ट्रोक, दिल की बीमारियां, डायबिटीज, ओरल कैंसर, पाचन से संबंधित बीमारियां, आंत की बीमारियां, बैक्टीरियल निमोनिया और पेरियोडोन्टिस से ग्रसित गर्भवती महिलाओं को तो बच्चों को जन्म देने में कई परेशानियां तक हो सकती हैं।

मुंह के संक्रमण का शरीर की अन्य बीमारियों से कोई न कोई संबंध जरूर होता है। मसूढ़ों से खून आना, मसूढ़ों की बीमारियां, मुंह से दरुगध आना, मुंह का स्वाद बिगड़ना आदि कई तरह के संक्रमण से अन्य बीमारियां हो सकती हैं। मुंह में या दांतों और दांतों के आस-पास पाए जाने वाले बैक्टीरिया खून में शामिल होकर बीमारियां फैलाते हैं और शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं।

कई रोगों का कारण है यह
-दांतों में मौजूद बैक्टीरिया के कारण मसूढ़ों का संक्रमण होता है, जिससे अर्थेस्कनलेरॉसिस नामक हृदय रोग हो सकता है।
-पाचन प्रक्रिया मुंह में कई रासायनिक प्रतिक्रियाओं के साथ शुरू होती है। अगर हमारे दांत हमारे भोजन को अच्छी तरह से चबाने में असफल रहेंगे तो आंत भी ठीक ढंग से भोजन पचाने में असमर्थ रहेगी। ऐसे में पाचन संबंधी कई विकारों की आशंका बढ़ जाती है।
-एक रिसर्च से पता चला है कि जिनके मसूढ़ों में सूजन या रक्त निकलने की समस्या होती है, उनकी स्मरणशक्ति या कॉग्निटिव स्किल कमजोर हो सकती है।
-व्यक्ति की मुस्कान ही उसकी सबसे पहली अभिव्यक्ति होती है। यदि ऐसे में दांत स्वस्थ नहीं होंगे तो व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी होना स्वाभाविक है।
-अगर किसी व्यक्ति को उच्च रक्तचाप की समस्या है तो उसके पीरिओडेंटल से पीड़ित होने की आशंका भी अधिक होती है।
-कमजोर दांतों और अन्य ओरल प्रॉब्लम्स की वजह से विभिन्न प्रकार के संक्रमणों का खतरा अधिक होता है। मसूढ़ों की बीमारी और आर्थराइटिस के बीच भी गहरा संबंध होता है। ऑटोइम्यून दांतों की वो बीमारी है, जिसके कारण शरीर के जोड़ों में सूजन व दर्द जैसी शिकायतें होने लगती हैं।

सबसे ज्यादा समस्या
-दांतों में कैविटी
-मसूढ़े की समस्या
-विटामिन की कमी
-ओस्टियोपोरोसिस
-डायबिटीज या ओरल कैंसर

बचाव के उपाय
-फ्लॉस या किसी और प्रकार के इंटरडेंटल क्लीनर से एक बार दांत जरूर साफ करें।
-डेंटिस्ट से संपर्क करके मुंह की स्वच्छता के लिए एंटीमाइक्राबियल माउथरिंज का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
-संतुलित भोजन लें और फास्ट फूड का कम सेवन करें।
-दांतों की नियमित जांच कराएं। इससे आपका समय, पैसा तो बचेगा ही, साथ ही आप मुंह में होने वाली समस्याओं से भी सुरक्षित रहेंगे।
-दांतों से कैलकलस या टारटर हटाने के लिए प्रोफेशलन क्लीनिंग का सहारा लें। इससे प्लेग के बैक्टीरिया भी निकल जाते हैं।
-तंबाकू का सेवन न करें, इससे ओरल कैंसर होने का खतरा बना रहता है।
-हमेशा सॉफ्ट टूथब्रश का इस्तेमाल करें, नहीं तो इससे आपके मसूढ़े छिल जाएंगे और जख्म  से खून आने लगेगा।
-काबरेनेटिड और अन्य पेय पदार्थो का सेवन भी कम करें।
-ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं। इससे मुंह की दरुगध कम होती है। दूध, चाय, कॉफी आदि में कम चीनी डालें।
-मुंह की ड्राइनेस को कम करने के लिए शुगर फ्री गम चबाएं, ताकि स्लाइवा बनता रहे।
-खाने के बीच में स्नैक्स आदि न लें।
-ऐसी कोई दवा न लें, जिससे दांतों का क्षरण हो। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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