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महावीर मंदिर व इस्कॉन में गीता जयंती

पटना, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। महावीर मंदिर परिसर में मंगलवार को गीता जयंती समारोह का शुभारंभ गीता के 11वें अध्याय की स्तुति के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन भवनाथ झा व अध्यक्षता परमाचार्य उद्धव दास ने की। उन्होंने कहा कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध में मोहग्रस्त अर्जुन को गीता का उपदेश देकर उन्हें कर्तव्य पथ पर अग्रसर किया था। इस अवसर पर महावीर मंदिर न्यास समिति के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने कहा कि ज्ञान, भक्ति व कर्म का संयोग गीता में ही हुआ है। जो व्यक्ति जिस रूप में गीता को देखता है उसे वहीं मिलता है।

गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कर्मकाण्ड की जटिलताओं को दूर कर यज्ञ में पशु बलि के स्थान पर मानस यज्ञ का प्रतिपादन किया है जो व्यावहारिक व आध्यात्मिक से महत्वपूर्ण है। डॉ. शिववंश पाण्डेय ने कहा कि गीता के चिंतन का मूल आधार सभी प्राणियों में समान दृष्टि की भावना है। गीता भक्ति, ज्ञान व कर्म के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। गीता सभी उपनिषदों का सार तत्व है।

डॉ. अंशुमाली ने कहा कि पाश्चात्य जगत में भी गीता के कर्मवाद का महत्व है। भारत में गीता शुरू से ही पूजी जाती रही है। परमाचार्य उद्धव दास ने कहा कि सनातन धर्म में तीन विधाएं हैं ज्ञान, कर्म, उपासना या भक्ति। सारे धर्मो का मूल वेद है। वेद का सार भाग उपनिषद है और इन उपनिषदों का सार भाग गीता है। इधर इस्कॉन में भी गीता जयंती समारोह का आयोजन किया गया। इस्कॉन के अध्यक्ष कृष्ण कृपा दास ने कहा कि मानव जीवन में गीता का काफी महत्व है

। जीवन की सभी समस्याओं का निदान गीता में है। मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति भी गीता से होती है। इस अवसर पर भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।ं

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