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गोरखपुर.. इंसेफेलाइटिस पर एक्शन में देर क्यों?

- बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से पूछा - इंसेफेलाइटिस से हो रही मौतों की जांच के लिए आई है टीम -तीन दिन की पड़ताल के बाद सामने रखेगी एक्शन प्लान- मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल का किया निरीक्षण- गैर सरकारी संगठनों की शिकायतें सुनीं वरिष्ठ संवाददाता गोरखपुर इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतों की पड़ताल के लिए आई राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से पूछा कि 33 साल पुरानी इस बीमारी के खात्मे के लिए कदम उठाने में देरी क्यों हुई? मंगलवार को मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद टीम के प्रमुख और आयोग की कोर कमेटी के सदस्य डॉ.योगेश दुबे ने कहा कि तीन दिन की पड़ताल के बाद आयोग इंसेफेलाइटिस के खात्मे का एक्शन प्लान केन्द्र और राज्य सरकार को सौंपेगी।इसके पहले सर्किट हाऊस में टीम ने बाल कल्याण समिति, मानव सेवा संस्थान ‘सेवा’, ग्राम नियोजन केन्द्र, ग्रामीण विकास संस्थान सहित कई गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों से अलग से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को वहां नहीं रहने दिया गया। डॉ.योगेश ने मेडिकल कॉलेज में बताया कि इस बातचीत में आयोग के सामने कई महत्वपूर्ण तथ्य लाए गए। उनमें से कुछ के बारे में आयोग पहले से वाकिफ था। टीम सवा 12 बजे मेडिकल कालेज पहुंची। वहां वार्ड नम्बर 12, 14, छह और 10 में इंसेफेलाइटिस से पीडिम्त बच्चों को देखा और उनके परिवारीजनों से इलाज की स्थिति के बारे में जानकारी ली। बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो.केपी कुशवाहा ने डॉ.योगेश और आयोग के सलाहकार दिव्यांकर को बीआरडी में उपलब्ध सुविधाओं और स्टाफ के बारे में जानकारी दी। सीएमओ डॉ.आरएन मिश्र ने हाल में स्वीकृत 100 बेड के इंसेफेलाइटिस वार्ड और बीआरडी को उपलब्ध कराए गए अतिरिक्त संसाधनों के बारे में बताया। इस दौरान डॉक्टरों और पीजी सीट्स की कमी का मुद्दा भी उठा। डॉ.योगेश ने कहा कि इंसेफेलाइटिस से बाल मृत्यु का सिलसिला अब भी रुकने का नाम नहीं ले रहा। बाल अधिकार आयोग इसे लेकर गम्भीर है। पिछले महीने ही लखनऊ में डीजी हेल्थ के साथ इस मुद्दे पर बैठक हुई थी। फील्ड विजिट में साफ दिख रहा है कि बीमारी की रोकथाम के लिए अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। टीम अगले दो दिन मण्डल में रहकर इंसेफेलाइटिस से हुई मौतों के आंकड़ाें और जमीनी हकीकत की पड़ताल कर कमियों को चिह्न्ति करेगी। सात दिसम्बर को कुशीनगर के गांवों में जाएगी और आठ दिसम्बर को कुशीनगर में मण्डल के अधिकारियों से बीमारी पर काबू पाने के उपायों के बारे में बात करेगी। इसके बाद एक एक्शन प्लान सामने रखा जाएगा। इस एक्शन प्लान को लागू करने के लिए आयोग अपनी रिपोर्ट केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजेगा। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के निरीक्षण के बाद टीम ने भटहट के जंगल माघी गांव और पिपराइच स्वास्थ्य केन्द्र का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिला अस्पताल में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ.एके पाण्डेय और भटहट-पिपराइच में जिला मलेरिया अधिकारी डॉ.एके पाण्डेय ने टीम के सवालों का जवाब दिया।----------------

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