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पटरी पर दम तोड़ती जिंदगी

वरीय संवाददाता, पटना। पटरी पर जिंदगी दम तोड़ रही है। पिछले 11 महीने में ही 127 लोगों की मौत हो चुकी है। यह सिर्फ पटना जंक्शन रेल पुलिस थाना के क्षेत्राधिकार की खौफनाक हकीकत है। फिर भी लोग है कि मानते नहीं और सामने ट्रेन को देखने के बावजूद जान हथेली पर लेकर पटरी पार करते हैं। एक तो पटरी पर चलने का जोखिम उस पर से लापरवाही की हदें पार करते हैं।

गाजियाबाद में मोबाइल पर गाना सुनने में मशगूल दो स्कूली छात्रों के ट्रेन से कटने का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि कमोबेश वही कहानी सोमवार की रात राजेन्द्रनगर टर्मिनल के समीप दोहराई गई जहां पटरी पर बात करने के दौरान ट्रेन की चपेट में आकर पिता और पुत्री की मौत हो गई जबकि मां बाल-बाल बच गई। जंक्शन हो या प्लेटफॉर्म या बाहरी इलाका। हर जगह हादसों की एक ही स्थिति है।

वैसे जाडेम् के मौसम में ट्रेन से कट कर होनी वाली मौत का ग्राफ बढ़ जाता है। साथ ही इंजन में आये तकनीकी बदलाव से भी पटरी पर हादसों की रफ्तार बढ़ी है। जाडेम् में उन जगहों पर अधिक लोग ट्रेन की चपेट में आते हैं जहां पटरी के आसपास सघन आबादी होती है। पटना जंक्शन रेल थानाध्यक्ष रामपुकार सिंह के मुताबिक पहले की अपेक्षा अब ट्रेन इलेक्ट्रिक (बिजली) से चलती है और इंजन की आवाज काफी कम गई है। ऐसे में खासकर सुबह और देर शाम कोहरे के बीच शौच आदि या पटरी पार करने के क्रम में लोगों को ट्रेन के आने का पता नहीं चल पाता है जिससे अनहोनी होती है। क्या है कानूनरेलवे एक्ट की धारा 147 के तहत रेल परिसर में प्रतिबंधित स्थानों पर जाना या चलना अवैध है।

इसमें आरोपित को 800 रुपये जुर्माना या तीन महीने तक की कैद हो सकती है। वैसे जिंदगी को दांव पर लगा कर पटरी पार करने वालों पर कार्रवाई कभी-कभार ही होती है। विशेषकर बडेम् हादसों के बाद पुलिस की चौकसी दिखती है पर बाद में स्थिति यथावत हो जाती है।

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