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ग्राहकों से दूरियां बढ़ा रहे हैं बीएसएनएल

बरेली, निज संवाददाता। एक तरफ बीएसएनएल की सेवाएं ग्राहकों को रुला रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अधिकारी कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है। स्थिति यह है कि न तो लैंड फोन निर्धारित समय में ठीक हो रहे हैं और न ही मोबाइल नेटवर्क में सुधार हो पा रहा है। इससे भी ज्यादा बुरा हाल ब्राडबैंड सेवाओं का है। हालांकि इन समस्याओं से बीएसएनएल के अधिकारी वाकिफ हैं पर समाधान की दिशा में अब तक कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।

चिंता जनक यह कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश सर्किल के मुख्य महाप्रबंधक की उदासीनता भी पूरी व्यवस्था पर सवाल खडेम् कर रही है। मुश्किल में ग्राहक बीएसएनएल अफसर अस्त-व्यस्त संचार सेवाओं से पूरी तरह बेखबर बने हुए हैं। समय पर बिल वितरण नहीं हो रहे हैं। साथ ही आए दिन ब्रॉडबैंड, इंटरनेट एवं मोबाइल फोन आधुनिक सेवाएं प्रभावित रहती हैं। बेसिक फोन तादाद कम होने पर भी कई दिनों ठीक ही नहीं होते हैं। विशिष्ट ग्राहकों तक ओएफसी संचार सुविधा नहीं पहुंच पा रही है।

बेसिक फोन ग्राहक अपने सेट बदलवाने को परेशान हैं। इसी तरह वाईफाई ब्रॉडबैंड माड़ा अर्से से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। जब कोई मुखिया आता है तो ग्राहक अपनी परेशानी बताना चाहते हैं मगर अफसरों ने ग्राहकों से मिलने के रास्ते लगभग बंद कर दिए हैं। समीक्षा मीटिंग आजपश्चिमी उत्तर प्रदेश सर्किल के सीजीएम प्रदीप पालीवाल बुधवार को यहां आएंगे। सुबह दस से शाम पांच बजे तक विभागीय कार्यो की समीक्षा होगी, वह भी शहर से करीब 15 किमी दूर।

दरअसल, सीजीएम को डर है कि यदि वह शहर में मीटिंग करते हैं तो बीएसएनएल सेवाओं से त्रस्त ग्राहक हंगामा खड़ा कर सकते हैं। दूसरे, उनका यह दौरा सरकारी कम, निजी ज्यादा है इसलिए पब्लिक की नजरों से जितना दूर रहा जाए उतना ही अच्छा। सीजीएम पर आरोपबीएसएनएल यूनियन अध्यक्ष अशरफ अली का आरोप है कि सीजीएम प्रदीप पालीवाल निजी दौरों को, सरकारी दौरा बनाकर विभाग को चूना लगा रहे हैं। हर बार सीजीएम अपने निजी कार्यक्रमों के तहत ही विभागीय दौरा बनाते हैं।

एक दौरे पर लाखों रुपया खर्च होता है पर उससे न तो विभाग में कोई सुधार होता है और न ही ग्राहकों की किसी समस्या का हल ही हो पाता है। ‘‘सीजीएम को बीएसएनएल ग्राहकों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को दूर करना चाहिए। उनका ग्राहकों के प्रति नकारात्मक रवैया चिंताजनक है। मेरी मांग है कि सीजीएम के दौरों की भी उच्च स्तरीय समीक्षा होनी चाहिए। ’’- सतीश यादव,सांसद प्रतिनिधि मेनका गांधी व पूर्व टीएसी सदस्यं

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