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एफडीआई से देश में अस्थिरता बढ़ेगी: डॉ. जोशी

विरष्ठ संवाददाता, वाराणसी। भाजपा सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने एफडीआई को लेकर केन्द्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है किजिंस तरह से केन्द्र सरकार ने इस मुद्दे को कुछ िदनों के िलए टाला है उससे सरकार की नीित व नीयत ठीक नहीं लग रही है। सरकार इस मुद्दे को शीतकालीन सत्र के बाद बजट सत्र तक खींचना चाहती है।

भाजपा की मांग है कि सरकार इस मुद्दे पर बहस कराकर मामले को खत्म करे। ऐसा न करे कि समाज में तनाव पैदा हो और देश में अिस्थरता बढ़े। उन्होंने लोकपाल के मुद्दे पर अन्ना हजारे के बुलावे पर कहा कि जरूरत होगी तो बैठक में अवश्य भाग लेंगे।

मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में डॉ. जोशी ने कहा कि पार्टी ने संसद में महंगाई व भ्रष्टाचार पर बहस के िलए सूची में नंबर पहले से दर्ज है लेकिन सरकार ने इन दोनों मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए एफडीआई को सामने ला िदया। सरकार बहस कराने से घबरा रही है क्योंकि सरकार अल्पमत में है। सरकार के कई सहयोगी दल उसके साथ नहीं हैं।

यही कारण है कि कभी िवत्तमंत्री प्रणव मुखर्जी विपक्षी दलों से राय लेने की बात कर रहे हैं तो कभी पीएम एफडीआई नीित को िहतकारी बताते हुए उसे लागू कराने पर अमादा हैं। उन्होंने कहा कि मल्टीनेशनल कंपिनयों के पास पैसा है। लिहाजा एक बार वॉलमार्ट जैसी कंपिनयां भारत में प्रवेश कर गईं तो वह आर्थिक मोर्चे के साथ राजनीति को भी प्रभािवत करेंगी। क्योंकि लोकतंत्र में धनबल का प्रयोग हमेशा अिनष्टकारी रहा है।

डॉ. जोशी ने कहा कि दुनिया के किसी भी देश में वॉल मार्ट सस्ता सामान नहीं देता। वह मजदूरों का शोषण एवं महंगे सामान देता है। ऐसे में देश में जहां 80 फीसदी लोग किराना दुकान से सामान लेते हैं वहां पर विदेशी बाजार को बढ़ावा देना कहीं से भी ठीक नहीं है।

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