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संसद के हवाले होगा प्रधानमंत्री पर फैसला

लोकपाल दायरे में ग्रुप सी और डी कर्मचारियों को न रखने संबंधी सिफारिश पर आलोचना के बाद संसदीय समिति इन्हें राज्य लोकायुक्त दायरे में रखने का सुझाव दे सकती है।

नौ दिसंबर (शुक्रवार) तक राज्यसभा के अध्यक्ष को रिपोर्ट सौंपने की तैयारी कर रहे समिति के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी के अनुसार रिपोर्ट में किसी तरह की देरी नहीं है। बुधवार को बैठक में इसे स्वीकारने की औपचारिकता के बाद कभी भी रिपोर्ट सौंपी जा सकती है। समिति के सूत्रों के अनुसार, ग्रुप सी व डी कर्मचारियों पर विवाद के बाद एक सुझाव यह आया है कि इस श्रेणी के कर्मचारियों को राज्यों के लोकायुक्त के अधीन रखा जाना चाहिए।

इसी तरह के करीब एक दजर्न से अधिक विषयों पर सदस्यों के बीच सहमति नहीं बनी है। इनमें प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में रखना भी शामिल है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री का मसला संसद पर छोड़ने का सुझाव भी है।
संसद चाहे तो इस पर बहस कर फैसला कर सकती है। गौरतलब है कि समिति में भाजपा व अन्य दलों के प्रतिनिधियों की सिफारिश को खारिज करते हुए कांग्रेस सदस्यों ने ग्रुप सी व डी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने की मांग की थी।

कांग्रेस सदस्यों का तर्क था कि अकेले ग्रुप ए व बी कर्मचारियों की संख्या ढाई लाख से ऊपर है। ग्रुप सी व डी में 23 से 25 लाख कर्मचारी हैं। इतनी बड़ी संख्या पर निगरानी के लिए अकेले लोकपाल पर निर्भर रहना उचित नहीं होगा।
समिति की सिफारिश है कि ग्रुप सी व डी में केंद्रीय कर्मचारियों का मामला पहले की तरह केंद्रीय निगरानी आयोग (सीवीसी) ही देखे।

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