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कमाल के होंगे रेलवे की कमान संभालने वाले ये रक्षक

26/11 मुंबई हमले के दौरान वहां के रेलवे स्टेशन पर पुरानी राइफल के सहारे आंतकियों से मुकाबला करने की आरपीएफ जवानों की नाकाम कोशिश को लोग अभी भूले नहीं होंगे। तब रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे। मगर, इस तरह के हमलों को नाकाम करने के लिए अब आरपीएफ के विशेष प्रशिक्षित कमांडो कमान संभालेंगे।

ये जवान न केवल हर तरह की गतिविधियों पर पैनी नजर रखेंगे, बल्कि अत्याधुनिक हथियारों की मदद से आतंकियों को नेस्तनाबूद करने में भी सक्षम होंगे। रेल मंत्रलय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आतंकियों से लोहा लेने के लिए 1500 आरपीएफ जवानों की पहला दस्ता तैयार है। ये जवान एनएसजी कमांडो की तरह होंगे। इनका चयन रेलवे सुरक्षा विशेष बल (आरपीएसएफ) से किया गया है। उसके बाद उनकी कई स्तर पर छंटनी की गई। चयनित जवानों को आर्मी ट्रेनिंग सेंटर-तेजपुर, बार्डर सिक्योरिटी फोर्स-हजारीबाग व पटियाला तथा काउंटर इनसरजेंसी-सिल्चर केंद्रों में छह महीने का कड़ा शारीरिक प्रशिक्षण दिया गया है।

जवानों को अत्याधुनिक हथियार चलाने, रस्सी के सहारे ऊपर चढ़ने, ऊंचाई से कूदने, आक्रमण करने, हमला होने पर विपरीत परिस्थितियों में तत्काल निर्णय लेने तथा घायल साथी व यात्री को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के गुर सिखाए गए हैं। यानी वे किसी भी कठिन परिस्थिति में आतंकियों से मुकाबला कर सकते हैं। खास बात यह है कि महिला वाहनी की नई टुकड़ी में 654 आरपीएफ महिला जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

वैसे आरपीएफ के जवानों को भर्ती के बाद नौ महीने का सामान्य प्रशिक्षण दिया जाता है। हथियार के नाम पर इनके  पास महज राइफल होती है। आत्मसुरक्षा के लिए भी इनके पास व्यापक उपकरण मौजूद नहीं होते हैं।

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