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सालों से नहीं हुई गार्ड एवं रेंजर की बहाली

हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना। वन विभाग सूबे में हिरयाली फैलाने के लिए जोर-शोर से पौधरोपण करने में लगा है। इसके अलावा वन क्षेत्र को बढ़ाने और मौजूद वन क्षेत्रों के संरक्षण के िलए भी विभाग कई स्तर पर प्रयास कर रहा है। वाल्मिकी व्याघ्र पिरयोजना समेत पर्यावरण संरक्षण की कई पिरयोजनाएं चल रही हैं। परंतु इन तमाम प्रयासों में सबसे बड़ी बाधा कर्मचारियों की कमी आ रही है।

वन विभाग में जिंतनी जरूरत है, उसके एक तिहाई कर्मचारी और पदाधिकारी नहीं हैं। विभाग में उच्च स्तर पर अधिकारियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन िनचले स्तर पर काम करने वालों की काफी कमी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, फारेस्ट गार्ड, रेंजर, फारेस्टर की बहाली 20 सालों से ज्यादा समय से नहीं हुई है। आधारभूत मानव संसाधनों की कमी की वजह से जंगल क्षेत्र का निरीक्षण ठीक से नहीं हो पाता। पेड़ों की अवैध कटाई और मौजूदा अभ्यारण्यों की देखभाल करने में भी िवभाग पूरी तरह मुस्तैदी नहीं रख पाता है। कई बार बहाली की सुगबुगाहट भी हुई, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ पाया।

वर्तमान में फारेस्टर के करीब 40, गार्ड के 300 और रेंजर के 7 पद खाली पड़े हुए हैं। इसके अलावा दूसरे और तीसरे स्तर के कर्मचारियों के भी काफी पद खाली पड़े हुए हैं। इससे एक पदाधिकारी दो-तीन पदों के प्रभार में हैं। इस संबंध में प्रधान वन संरक्षक वीए खान का कहना है कि भर्ती संबिंधत सेवा कानून तैयार किया जा रहा है। 1983 के बाद से यह बना ही नहीं है।

रोस्टर भी काफी लंबे समय से क्लियर नहीं हुए थे। अब कईजिंलों में इसे क्लियर कर लिया गया है। शेष का काम चल रहा है। बहाली की प्रक्रिया जल्द शुरू कर दी जाएगी।

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