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स्वाद को दें सेहत का तड़का

आहार विशेषज्ञों की मानें तो खाना बनाते समय जितना ध्यान हम स्वाद पर देते हैं, उतना पौष्टिकता पर नहीं देते। यही कारण है कि खाना पकाते समय आम, लेकिन उपयोगी नियमों का पालन न करके हम खाद्य पदार्थो के 40 प्रतिशत तक पौष्टिक तत्वों को नष्ट कर देते हैं। खाने में स्वाद के संग सेहत का साथ होना जरूरी है, बता रही हैं पूनम जैन

खाद्य पदार्थ सिर्फ कैलोरी नहीं देते, वे शरीर के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति भी करते हैं। क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत करते हुए शरीर की गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने का काम भी खाद्य पदार्थों का होता है। पर यह तभी संभव है, जब आप पौष्टिक चीजें खाते हैं। यह सच है कि घर के बने खाने में रेस्तरां या होटल की तुलना में सैचुरेटेड फैट, सोडियम और कृत्रिम शुगर की मात्र कम होती है। जरूरत के मुताबिक आप कैलोरी पर भी नियंत्रण रख सकते हैं, पर इसके लिए कुछ आहार नियमों का ध्यान रखना जरूरी होगा।

समझों सेहत की जरूरत
हाल में प्रकाशित ‘सत्व द आयुर्वेदिक कुक बुक’ में कुकरी एक्सपर्ट कौशानी देसाई कहती हैं, ‘आयुर्वेद में खाने की मात्र, खाद्य पदार्थों की प्रकृति, खाना पकाने की विधि के साथ-साथ व्यक्ति की सेहत को ध्यान रखने पर जोर दिया गया है।’

बेंगलुरू स्थित क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट और डाइट कंसल्टेंट अंजू सूद के अनुसार एक संतुलित आहार में 60 से 70% काबरेहाइड्रेट, 15 प्रतिशत प्रोटीन और 15 प्रतिशत के करीब वसा होना चाहिए। कुकिंग ऑयल को दृश्य वसा में शामिल किया जाता है। आमतौर पर महिलाओं की उपापचय दर में तीस वर्ष के बाद से बदलाव होता है।

ऐसे में यदि नियमित रूप से 4 से 5 चम्मच कुकिंग ऑयल इस्तेमाल करते हैं तो तीस के बाद तीन चम्मच और 45 की उम्र के बाद दो चम्मच कर देना चाहिए। अत: वजन नियंत्रित रखने के इच्छुक लोग, जिन्हें कम कैलोरी में अच्छा पोषण चाहिए, उन्हें खाना पकाते समय कम घी या तेल वाली  ग्रिलिंग, स्टीमिंग यानी भाप में पकाना, नॉन स्टिक में हलके से चलाने जैसी विधियां अपनानी चाहिए।

इसी तरह यदि आपको कम कैलोरी और अधिक कैल्शियम की जरूरत है तो वसा रहित टोंड दूध  इस्तेमाल करें। जहां सामान्य एक कप दूध में 3.5 प्रतिशत वसा, 150 कैलोरी और 290 मिलीग्राम कैल्शियम होता है, वहीं टोंड दूध के एक कप दूध में 0.5 प्रतिशत वसा, 90 कैलोरी और 316 मिलीग्राम कैल्शियम होता है।  

छोटी पर काम की बातें
कुकरी एक्सपर्ट कौशानी देसाई कहती हैं, ‘सब्जियां पकाते समय चीजों को पकने में लगने वाला समय और उचित तापमान का ध्यान रखें। खाद्य पदार्थो को देर तक पकाने से उनके पोषक तत्व कम हो जाते हैं। खाद्य वस्तुओं का टेक्सचर और रंग बदल जाता है।’ हरी पत्तेदार सब्जियों को नींबू या इमली के साथ भी नहीं पकाना चाहिए। इससे उनकी पौष्टिकता कम होती है, साथ ही रंग बदल जाता है। सब्जियों के इस हरे रंग में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं। कौशानी कहती हैं, हरी पत्तेदार सब्जियों में मौजूद विटामिन और मिनरल पानी में घुलनशील होते हैं, इसलिए इन्हें काटने से पहले धो लेना चाहिए। बारीक काटने के बाद न धोएं, साथ ही इन्हें ढक कर पकाएं।

दिल्ली स्थित न्यूट्रिशनिस्ट शिखा शर्मा के अनुसार, सरसों के तेल में ओमेगा 3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड का सही संतुलन होता है। मैं खाना पकाने में सरसों और जैतून का तेल इस्तेमाल करने की सलाह देती हूं। उदाहरण के लिए आप अपना नाश्ता और रात का भोजन जैतून के तेल में बना सकते हैं, वहीं दोपहर का भोजन सरसों के तेल में।

आमतौर पर हम सभी रिफाइंड तेल इस्तेमाल करते हैं, पर कई स्तर पर प्रोसेस होने के कारण उसके पोषक तत्वों में कमी आ जाती है। खासतौर पर सर्दियों में सरसों का तेल सेहत के लिए अच्छा रहता है। जैतून के तेल में मोनोसेचुरेटेड वसा होती है, जो सेहत को स्वस्थ बनाए रखने के लिए अच्छे वसा तत्व  प्रदान करता है।’

कौशानी कहती हैं, यदि आप मसालों का पूरा स्वाद उठाना चाहते हैं तो खाद्य पदार्थ बनाते समय कम नमक डालें। सब्जियों को देर तक पकाने या बार-बार गर्म करने से बचें। ताजी मौसमी सब्जियां इस्तेमाल करें, वे जल्दी पकती हैं और स्वादिष्ट बनाने के लिए अधिक मसालों या वसा  की जरूरत भी नहीं होती।  जिन खाद्य पदार्थो में अधिक मात्र में क्रीम, योगर्ट, घी या तेल होता है, वे स्वाद और टेक्सचर में बढ़िया होते हैं, कैलोरी ज्यादा देते हैं, पर उनमें पौष्टिकता कम होती है। तड़का तैयार करते समय प्याज, अदरक और मसालों को बहुत अधिक घी या तेल में  देर तक न भूनें। जीरा या हींग डालने से पहले तेल को बहुत देर तक गर्म भी नहीं करना चाहिए।’

डीप फ्राइंग के हैं नुकसान
ज्यादा तेल या घी में तल कर बनाए गए खाद्य पदार्थो में सैचुरेटिड फैट्स और ट्रांस फैट्स होते हैं, जिनसे हृदय रोगों और मधुमेह रोगों की आशंका बढ़ जाती है। इसी तरह तेल को उच्च तापमान पर गर्म करने से वह टॉक्सिक का रूप धारण कर लेता है, जिसे एक्रेलेमाइड कहते हैं। यह तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क के लिए अच्छा नहीं माना जाता। नियमित रूप से अधिक तला हुआ भोजन करना कैंसर जैसे रोगों की आशंका को बढ़ाता है। जहां तक संभव हो, तलने में कम तेल का इस्तेमाल करें। इससे उस तेल को स्टोर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

खाना पकाने की कुछ विधियां

स्टीमिंग यानी भाप में पकाना: पोषक तत्वों को सुरक्षित रखने का यह सबसे अच्छा तरीका है। ताजी सब्जियां जैसे कि गाजर, फूल गोभी, ब्रोक्कोली, पालक और बींस आदि को जहां तक संभव हो, भाप में पकाएं। मौसमी सब्जियों को स्ट्रीमर या इडली बनाने वाले बर्तन में या प्रेशर कुकर की भाप में पका सकते हैं।

स्टर फ्राइंग: इसमें कम मात्र में घी या तेल की जरूरत होती है। इसमें कम देर के लिए सब्जियों को पकाया जाता है। खाद्य पदार्थ कम तेल के कारण पैन से न चिपकें, इसके लिए धीरे-धीरे हिलाते रहें या बीच में थोड़ा पानी छिड़क दें। सभी पोषक तत्व और खाद्य पदार्थों का रंग व फ्लेवर सुरक्षित रहता है।

ग्रिलिंग: यह प्रक्रिया खाद्य पदार्थो के फ्लेवर और टेक्सचर को बढ़ाती है। घी या तेल का इस्तेमाल बहुत कम होता है। पकाए जाने वाली वस्तु को ग्रिल के ऊपर रखते हैं, जिसमें नीचे से आंच आती है।

रोस्टिंग: सब्जियां पकाने के लिए रोस्टिंग को तेज और आसान तरीके के रूप में जाना जाता है। पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। जैतून के तेल का इस्तेमाल करें।

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