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किशोर लड़कियों को अधिक होता है एनोरेक्सिया

एनोरेक्सिया से पीड़ित व्यक्तियों का वजन तेजी से घटता है। कमजोर होने के बावजूद इनका ध्यान हर समय कैलोरी और वजन घटाने पर लगा रहता है। आइने में उन्हें अपना शरीर मोटा दिखाई देता है।

माया, उम्र 17 साल, एनोरेक्सिक है। उसका वजन केवल तीन माह में गिर कर 58 से 35 किलो हो गया है। हड्डियां चमकने लगी हैं, त्वचा पीली और आंखें अंदर धंसी हुई लगती हैं। पहले हर समय ताजगी से भरपूर रहने वाली माया को कम वजन के बावजूद लगता रहता है कि वह मोटी है। खाते समय माया सिर्फ कैलोरी कम करने के बारे में सोचती रहती है। घर वालों की चिंता पर उसे लगता है कि उन्हें उसका मोटापा क्यों नहीं दिख रहा। अतिरिक्त रोटी खाने पर वह दो घंटे व्यायाम करने लगती है।

दरअसल माया एनोरेक्सिक है। वह एनोरेक्सिया नवरेसा से पीड़ित है। इसका कारण, उसमें दिखाई देने वाले तीन लक्षण हैं- पहला वह उचित वजन हासिल करने के लिए  उदासीन है, हर समय वजन बढ़ने की चिंता रहती है और अपने शरीर की वह गलत छवि देखती है। ऐसी स्थिति में चूंकि शरीर को पर्याप्त कैलोरी नहीं मिलती, इससे  पोषक तत्वों, प्रोटीन और ओमेगा फैट की कमी हो जाती है, बालों और नखूनों की चमक व टेक्सचर में अंतर आने लगता है।

एनोरेक्सिया की समस्या लड़कियों में अधिक मिलती है और इसकी शुरुआत आमतौर पर किशोरावस्था में हो जाती है। भारत में भी इस बीमारी के लक्षण तेजी से बढ़ने लगे हैं। पर अभी भी इसके उपचार के लिए लोग सजग नहीं हैं। तेजी से वजन घटना और किशोर लड़कियों का बॉडी शेप और वजन को लेकर अजीबोगरीब व्यवहार परिवार के सदस्यों को परेशान कर देता है।

एनोरेक्सिक की शुरुआत वजन कम करने वाले आहार और व्यायाम कार्यक्रमों के रूप में देखने को मिलती है। कुछ समय बाद स्वभाव में उग्रता आ जाती है। एनोरेक्सिक को हमेशा लगता है कि उसने अधिक खा लिया है। कुछ महीनों के भीतर कुल वजन 20 से 25 प्रतिशत तक घट जाता है, जिससे शरीर में फ्लुइड संतुलन बिगड़ जाता है, ब्लड प्रेशर कम और मांसपेशियों में खिंचाव और थकावट महसूस होती है। इन्हें जुकाम आसानी से हो जाता है, आसपास के तापमान में अंतर अनुरूप वे शरीर के तापमान का संतुलन नहीं बना पाते। कइयों को हर समय ऊनी कपड़े पहनने की जरूरत होती है। बाल भी जल्दी सफेद होने लगते हैं।

उपचार
यहां परिवार के सदस्यों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। माइंड डिसऑर्डर, जिसमें व्यक्ति किसी कारण को नहीं समझता, उसे उपचार के लिए तैयार करना आसान नहीं होता। सदस्यों को अपने तनाव, गुस्से, सहानुभूति, भावनाओं पर काबू रखना होता है। एनोरेक्सिक की देखभाल कर रहे व्यक्ति के लिए सबसे पहले जरूरी है कि वह खुद को एनोरेक्सिक व्यक्ति की जगह रख कर देखें। इसके बाद साइकोलॉजिस्ट और न्यूट्रिशनिस्ट का उपचार मदद देगा।

एनोरेक्सिक को पर्याप्त पोषण दें और उन्हें  स्कूल और कॉलेज में करिकुलर गतिविधियों और प्रोजेक्ट्स में भाग लेने के लिए प्रेरित करें। उनके साथ बातें करें, उनकी वास्तविक स्थिति बताएं। उन खाद्य पदार्थों पर जोर दें, जो मानसिक रूप से मजबूत बनाते हों, ना कि उनका वजन बढ़ाएं। घर का बना पनीर, टोफू, हरी पत्तेदार सब्जियां, समुद्री भोजन, अंडे का सफेद भाग आदि खिलाएं। जैसे-जैसे शरीर में हेल्दी पोषक तत्वों की मात्र बढ़ेगी, अन्य तत्व जैसे विटामिन ए, डी, बी-कॉम्लेक्स और ओमेगा आदि तत्वों की जरूरत होगी। ऐसा करना मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में सुधार करेगा, विचारों में स्पष्टता आएगी और एनोरेक्सिया से पीड़ित व्यक्ति भावनात्मक रूप से स्थिर होगा।
मिंट से साभार

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