DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

महफूज नहीं महिलाएं

देश की राजधानी दिल्ली अब ‘क्राइम कैपिटल’ हो गई है। खासकर पिछले कुछ वर्षो में दिल्ली व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की हालत ऐसी बदली है कि महिलाओं के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। कामकाजी महिलाओं को तो और ज्यादा दिक्कतों से गुजरना पड़ रहा है। ऐसी खबरें आती रहती हैं कि दिल्ली के इस इलाके से इस लड़की को अगवा कर लिया गया, तो दिल्ली के उस इलाके में उस लड़की की हत्या कर दी गई। दिल्ली पुलिस और सरकार की इस मुद्दे पर चुप्पी से लोगों की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। साफ है कि अपराधियों की बढ़ती हिम्मत को रोकना होगा। क्या सरकार के पास इस समस्या का कोई समाधान है?
आकाश जैन, दिल्ली

नाराजगी की वजहें
किसी भी मंत्री पर थप्पड़ चलाना अनुचित है। यह अपने विरोध को प्रकट करने का अलोकतांत्रिक तरीका है। एक लोकतांत्रिक देश में ऐसा रवैया बताता है कि कहीं न कहीं हम पर भी तानाशाही प्रवृत्तियां हावी हो गई हैं। क्या हमारे यहां लीबिया, इराक, ईरान व सीरिया जैसे हालात बन रहे हैं? अब तक तो हमें यही पता था कि हमारे देश के लोग अमन व शांति पर भरोसा करते हैं। फिर नाराजगी का यह घिनौना प्रदर्शन क्यों? बेशक, नेताओं के प्रति हमारा गुस्सा बढ़ता जा रहा है। हमारे जन प्रतिनिधि संसद में लोकतांत्रिक मर्यादाओं की सारी हदें पार कर रहे हैं। लगातार महंगाई बढ़ रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ भी लोगों का गुस्सा अपने चरम पर है। परंतु एक सभ्य नागरिक होने के नाते हमें अपनी भावनाओं पर काबू रखना होगा।
विजय लोढ़ा, रायपुर, छत्तीसगढ़

बंटवारा नहीं, विकास चाहिए
देश में कई राज्यों के बंटवारे के मामले लंबित पड़े हैं। चाहे वह आंध्र प्रदेश से तेलंगाना को अलग करने की मांग हो या उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य को चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव। यूपी के विभाजन प्रस्ताव में विकास कम, राजनीति ज्यादा है। दूसरे शब्दों में कहा जाए, तो इसका मकसद राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करना है। अधिक क्षेत्रफल वाले राज्यों में आर्थिक विकास पूरी तरह संभव है। वहां भी प्राकृतिक संसाधन जैसे भूमि, वन आदि या उद्योग स्थापित होने की असीम संभावनाएं हैं। लेकिन हमारे देश में यह विडंबना है कि राजनेता मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था करने के बदले लोगों को जाति-धर्म के नाम पर बांटकर सत्ता पाने के लिए आपस में भिड़े रहते हैं। यदि छोटे राज्यों का प्रस्ताव स्वीकार भी कर लिया जाए, तो नवोदित राज्य में संबंधित सरकार से लोगों की उम्मीदें और बढ़ जाएंगी। इस स्थिति में अगर सरकार खरी नहीं उतरी, तो देश में झारखंड की तरह राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न हो जाएगी।
मुकेश कुमार साह, लक्ष्मी नगर, दिल्ली

यूपी के हालात
उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। आसन्न चुनाव को देखते हुए बड़े-बड़े सियासी धुरंधर मैदान में कूद पड़े हैं। प्रदेश के बंटवारे से लेकर सवर्ण आरक्षण तक के मसले उठ रहे हैं। विकास को भी बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा है। भ्रष्टाचार के मसले पर तो प्रदेश सरकार पहले से ही घिरी है। लेकिन अब तक दलगत भ्रष्टाचार के मुद्दे को किसी ने नहीं उठाया है। क्षेत्रीय स्तर पर अधिकतर नेताओं की छवि धूमिल हो गई है। कई मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप हैं। सभी पार्टियों के अंदर यही आलम है। जरूरत इस बात की है कि सभी पार्टियां साफ-सुथरी छवि के नेताओं को चुनाव में टिकट दें, तभी प्रदेश का विकास होगा।
दिलीप सिन्हा, वैशाली, गाजियाबाद

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:महफूज नहीं महिलाएं