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अदालत का बेटी का संरक्षण पिता को सौंपने से इंकार

दिल्ली की एक अदालत ने एक व्यक्ति को उसकी किशोरी बेटी का संरक्षण सौंपने से इंकार कर दिया है क्योंकि लड़की का कहना था कि वह अपनी मां के साथ खुश है और उसने पिता के साथ रहने से इंकार कर दिया था। अदालत ने कहा कि 15 वर्षीय लड़की की मां अपनी बेटी का बेहतर ख्याल रख रही है और वह अपनी मां के साथ खुश है। मां रक्षा मंत्रलय में काम करती है।

न्यायाधीश गौतम मनन ने कहा कि मां ने लड़की का बेहतर ख्याल रखा है और वह मां के साथ रहने से खुश है। इसके साथ ही अदालत ने बेटी का संरक्षण पिता को सौंपने से इंकार कर दिया।

अदालत का आदेश उत्तर प्रदेश के काशीपुर में लेक्चरर पिता की याचिका पर आया है। पिता ने बेटी को अपने संरक्षण में दिए जाने का अनुरोध करते हुए आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी अपने बच्चों के प्रति क्रूर है और उनकी पिटाई करती है।

पिता ने अपनी याचिका में कहा कि उनकी दिसंबर 1988 में शादी हुई और इस शादी से उनके दो बच्चे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 1997 से वे अपने बच्चों से मिलने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उन्हें अपने बच्चों से मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने पत्नी से तलाक के लिए अलग से याचिका दायर की है जो दूसरी अदालत में लंबित है।

पत्नी ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उनका पति अपने मन से अलग रह रहा था और 1997 से उसने बच्चों को साथ रखने में दिलचस्पी नहीं ली। महिला ने कहा कि पति ने अपनी तलाक याचिका में कभी नहीं यह उत्सुकता प्रदर्शित की कि वह अपने बच्चों को साथ रखना चाहता है।

अदालत ने 2004 और नवंबर 2011 में बच्ची से बातचीत की जिसमें लड़की ने पिता के साथ रहने से इंकार कर दिया।

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