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हरियाली पसंद है शकरखोरा

गौरैया, मैना, कोयल आदि कितने ही पक्षी तुम रोज देखते होगे। लेकिन क्या तुमने शकरखोरे को देखा है। नहीं देखा, कोई बात नहीं। आज हम तुम्हें इस पक्षी के बारे में बताते हैं। सबसे पहले तो यह जान लो कि अंग्रेजी में इसे परपल सनबर्ड कहते हैं। यह हमिंगबर्ड के परिवार की चिड़िया मानी जाती है। हमिंगबर्ड दुनिया की सबसे छोटी चिड़िया होती है।

शकरखोरा कई रंगों में पाई जाती है। यह ‘विच-विच’ आवाज निकालकर बोलती है। इस चिड़िया के गहरे रंग और चमकीले पंख ही इसकी सुंदरता को बढ़ाते हैं। कई जगह इसे फुलचुकी भी कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम नैक्टरीनिया ऐशियाटिका है। इसका आकार गोरैया से कुछ छोटा होता है। देखने में नर और मादा का आकार एक जैसा होता है। लेकिन इनके अलग-अलग रंग के कारण इन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है। नर पक्षी नीले और गहरे जामुनी रंग के होते हैं। जो दूर से देखने में चमकीले काले रंग के दिखाई देते हैं। इसके कंधे के पर के नीचे पीले और लाल रंग के रेशमी पंख भी होते हैं और मादा जैतूनी रंग की होती हैं। आमतौर पर दोनों साथ ही रहते हैं।

इस चिड़िया को हरे-भरे इलाके पसंद आते हैं। इसलिए यह ज्यादातर खेत, घास के मैदानों में रहती है। भोजन मे इसे खासतौर पर फूलों का पराग और मधु ही पंसद आता है, जिसे यह अपनी पतली, हल्की सी मुड़ी हुई चोंच से चूसती है। वैसे ये कीड़े-मकोड़े और मकड़ियां भी खा लेती है। घोंसला बनाने के लिए सनबर्ड छोटे पेड़ों, झाड़ियों की जगह चुनती है। जिससे घोंसला सुरक्षित रह सके। इसका घोंसला देखने में बिलकुल प्याले के आकार सा होता है और किसी पतली सी टहनी से लटका होता है। घोंसला बनाने का काम मादा ही करती है। मादा एक बार में 2 या 3 अंडे देती है जो सलेटी रंग के होते हैं। मादा अंडों की रक्षा करती है जबकि नर, बच्चों के अंडे से बाहर निकलने के बाद की जिम्मेदारी निभाते हैं। जैसे खाने का बंदोबस्त करना, उड़ना सिखाना आदि।

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