DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दांत की सफाई

सार्थक पांच साल का था। वह पहली कक्षा में पढ़ता था। गोरा, नटखट, गोलू-मोलू सा सार्थक पूरे घर को परेशान किए रहता था। उसके मम्मी-पापा नौकरी पर चले जाते थे और दादा-दादी उसकी देखभाल करते थे।

सार्थक की मम्मी नेहा उसे रोज सुबह स्कूल के लिए तैयार कर देती थी। वह सभी काम अच्छी तरह से करता था, सिवाय एक काम के और वह था ब्रश करना। उसकी मम्मी उसे टूथब्रश में पेस्ट लगाकर देती तो वह घंटों उसे देखकर रोता रहता और कहता, ‘मम्मी, मैं ब्रश नहीं करूंगा, मुझे इसमें मिर्ची लगती है।’ मम्मी को भी ऑफिस के लिए देर हो रही होती इसलिए वह उसे डांटते हुए जैसे-तैसे ब्रश करा देती थी। दांतों में ब्रश करने के लिए सार्थक का हंगामा करने का रोज का नियम बन गया था।

एक दिन सार्थक के मामा वत्सल उनके घर आए। वह दांतों के डॉक्टर थे। सार्थक, अपने मामा को बहुत पसंद करता था और उनके कंधे पर चढ़कर घूमता था। शाम को जब वत्सल घर जाने लगे तो सार्थक बोला, ‘मामा, प्लीज आज रुक जाओ।’ मामा बोले, ‘नहीं बेटा, मुझे घर में और भी बहुत काम हैं। इसलिए अभी मेरा जाना जरूरी है।’ यह सुनते ही सार्थक बोला, ‘मामा जी, अगर आज आप रुक जाएंगे तो मैं कल आराम से टूथपेस्ट कर लूंगा।’ यह सुनते ही सार्थक की मम्मी बोलीं, ‘वत्सल, यह रोज ब्रश करते हुए रोता है और घंटों ब्रश में पेस्ट लगाकर इधर-उधर घूमता रहता है। जब जबरदस्ती इसके दांतों की सफाई करते हैं तो यह रोता है। अब तुम ही इसे कुछ समझाओ।’

नेहा की बात सुनकर वत्सल बोला, ‘ठीक है, कल हम खुद सार्थक के दांतों की सफाई करवाएंगे।’अगले दिन सुबह सार्थक उठा और जब उसे ब्रश में पेस्ट लगाकर दिया गया तो उसने मुंह में लगाते ही वही राग अलापना शुरू कर दिया कि उसमें मिर्च हैं। इस पर मामा वत्सल ने उससे मुंह खोलने को कहा और बोले, ‘बेटा, हम आपसे प्रॉमिस करते हैं कि आपको मिर्च नहीं लगने देंगे। केवल एक बार अपना मुंह खोलकर दिखा दो।’

सार्थक ने जब मुंह खोला तो मामा की हंसी निकल गई कि ब्रश का सारा पेस्ट सार्थक ने अपनी जीभ पर लगा लिया था। वह बोले, ‘बेटा, पेस्ट को मुंह में नहीं लेते और न ही इसको खाते हैं। इसे दांतों पर लगाकर रगड़ना होता है। तुम्हें मिर्च इसलिए लगती है क्योंकि इसे तुम जीभ पर लगा लेते हो। यदि मेरे तरीके से ब्रश करोगे तो तुम्हें ब्रश करने में बहुत मजा आएगा और इसमें ढेर सारा झाग भी बनेगा’। इसके बाद उन्होंने उसका मुंह अच्छी तरह धुलवाया और ब्रश में फिर से पेस्ट लगाया और उसके दांतों में धीरे-धीरे ब्रश को घुमाया।  सार्थक ने भी ब्रश को दांतों के आसपास घुमाया और कुछ देर में ढेर सारा झाग उसके मुंह से निकला। यह देखकर सार्थक को बहुत अच्छा लगा। ब्रश करने के बाद वह मामा की गोद में बैठ गया और बोला, ‘मामा जी आप तो बहुत अच्छे हैं। आपने मुझे न सिर्फ ब्रश करना सिखा दिया बल्कि ब्रश करते हुए खेल का मजा भी करा दिया ।’
मामा ने कहा, ‘हां बेटा, दांतों की सफाई तो बहुत जरूरी है और इसकी देखभाल कम उम्र से ही करनी चाहिए नहीं तो दांतों में कीड़ा लग जाता है, मुंह से बदबू आने लगती है और दांत में पीलापन आ जाता है। दांतों की सफाई करके तुम हमेशा दांतों की बीमारियों से दूर रह सकते हो। यहां तक कि तुम अपनी मनपसंद चीजें जैसे चॉकलेट, आईसक्रीम आदि भी खा सकते हो’। सार्थक बोला, ‘जी मामा, समझ गया और यह भी कि टूथपेस्ट में मिर्च नहीं होती।’ सार्थक की बात सुनकर दादा-दादी के साथ उसके मम्मी-पापा भी हंस पड़े। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दांत की सफाई