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मशीन जैसे हो जाते हैं आईआईटी में आ रहे बच्चे

वरीय संवाददाता पटना। पिछले 17 साल से आईआईटी कानपुर में पढ़ा रहा हूं। मैंने भी महसूस किया है कि अब आईआईटी में वैसे लड़के नहीं आ रहे हैं जैसे पहले आते थे। अब जो बच्चों यहां आ रहे हैं उनमें अधिकतर मशीन की तरह होते हैं क्योंकि उनमें परेशानियों से निपटने की क्षमता नहीं होती है। उनका दिमाग पूरी तरह थका हुआ होता है।

ये बातें कांसेप्ट ऑफ फीजिक्स सहित भौतिकी के कई महत्वपूर्ण किताबों के लेखक और आईआईटी कानपुर में प्रोफेसर एससी वर्मा ने सोमवार को एक कार्यक्रम में कहे। प्रोफेसर वर्मा ने इसका कारण भी बताया। उनके अनुसार, चूंकि आईआईटी में प्रवेश के लिए बच्चों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और इस दौरान उनका दैनिक जीवन पूरी तरह अव्यवस्थित हो जाता है।

उन्हें न खाने का होश रहता है और न सोने का। परीक्षा में कंपीट करने का जो दबाव रहता है वह उन्हें पूरी तरह असामाजिक बना देता है। ऐसे में उनकी दुनिया सिर्फ किताबों तक ही सिमट कर रह जाती है। ऐसे में उनके दिमाग पर गहरा असर पड़ता है। पटना निवासी और पटना सायंस कॉलेज से कॅरियर की शुरुआत करने वाले प्रो.वर्मा ने कहा कि देश का स्कूल और कॉलेज एजुकेशन गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। स्कूल और कॉलेज में मिल रही शिक्षा का जीवन से जुड़ाव नहीं है।

यही नहीं आज विज्ञान की पढ़ाई व्यावहारिक तरीके से नहीं हो रही है और प्रयोगशाला की भूमिका बैकग्राउंड में चली गई है। प्रो.वर्मा ने नारायण मूर्ति के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि आईआईटी में अच्छे छात्र नहीं आ रहे हैं। इसके लिए उन्होंने कोचिंग संस्कृति को दोषी ठहराया है। उन्होंने आईआईटी जेईई के पैटर्न में बदलाव की भी गुंजाइश बतलाई। बच्चों को दिए टिप्ससात घंटे जरूर सोयेंचिंता मत करें30 मिनट का प्रतिदिन एक्सरसाइज करें।स्कूल की पढ़ाई को जरूरी समझों क्योंकि वह जीवन जीने की कला सिखाता है।

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