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बिगड़ी बनाएगा फूड बिल

रिटेल में एफडीआई के जरिए मध्य वर्ग को राहत देने की असफल कोशिश के बाद सरकार गरीबों को मनरेगा जैसा तोहफा देकर खुश करने जा रही है। खाद्य मंत्रलय ने बहु प्रतीक्षित खाद्य सुरक्षा विधेयक 2011 को अंतिम रूप देकर कैबिनेट के पास भेज दिया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस पर मुहर लग सकती है। इसे संसद के मौजूदा सत्र में पेश किया जा सकता है।

खाद्य कानून बनने के बाद प्राथमिक श्रेणी के गरीब परिवारों को हर महीने प्रति व्यक्ति सात किलो अनाज तथा सामान्य श्रेणी के गरीब को प्रति व्यक्ति कम से कम तीन किलो अनाज मिलेगा। प्राथमिक श्रेणी के परिवारों को तीन  रुपये प्रति किलो चावल, दो रुपये प्रति किलो गेहूं और एक रुपये प्रति किलो ज्वार मिलेगा जबकि सामान्य श्रेणी के गरीबों को इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधे के बराबर कीमत चुकानी पड़ेगी।

हालांकि प्राथमिक श्रेणी और सामान्य श्रेणी का निर्धारण सामाजिक-आर्थिक जनगणना के आधार पर किया जाएगा। इसके वर्तमान के बीपीएल और एपीएल श्रेणी जैसा ही होने की उम्मीद है।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, खाद्य मंत्रालय ने विधेयक के मसौदे पर संबंधित मंत्रलयों की टिप्पणी एक दिसंबर को मिलने के बाद इसे कैबिनेट के पास भेजा है। इस फैसले से सरकार कांग्रेस पार्टी के 2009 के आम चुनाव के घोषणा-पत्र में जनता से किए वादे को पूरा करेगी। साथ ही भुखमरी खत्म कर 2015 तक सहस्नब्दि लक्ष्य हासिल करने की दिशा में भी यह अहम कदम होगा। इससे पहले संप्रग सरकार अपने पहले कार्यकाल में सूचना का अधिकार और मनरेगा जैसे लोक-लुभावन कानून पारित कर चुकी है।

इसके अलावा केंद्र सरकार ने ‘शिक्षा का अधिकार’ कानून भी लागू किया है। खाद्य सुरक्षा कानून को भी इसी दिशा में अगले कदम के तौर पर देखा जा रहा है। उधर, सिविल सोसाइटी ने सरकारी मसौदे के कई प्रावधानों का विरोध किया है। राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) के तीन अहम सदस्यों- अरुणा रॉय, ज्यां द्रेज और हर्ष मंदर ने खुलकर अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए प्रस्तावित विधेयक को सार्वभौम तरीके से (सबके लिए) लागू करने की मांग की है।

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