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जिंदगी की जीत का फलसफा है मुहर्रम

शोक और प्रसन्नता जीवन के दो अहम पहलू हैं। इसके बगैर जीवन बेरस है और जिंदगी में एकरसता आ जाए, तो समझ लें, सब कुछ ठीक नहीं। उर्दू का मुर्हरम महीना जिंदगी की इसी फिलॉसफी को कहता है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि मुसीबत के थपेड़े झेलने का अर्थ हार मानना नहीं, बल्कि दोबारा खुद को तैयारकर जिंदगी का बाकी सफर तय करना है। मुहर्रम में खुदा के सबसे चहेते पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे और उनके परिजन कर्बला की जंग में शहीद हुए थे। इस दर्दनाक वाकये को याद कर दिल रो पड़ता है।

लेकिन मुहर्रम का केवल यही एक पहलू नहीं है। इस महीने ने इस्लामी इतिहास को कई अहम मोड़ और किरदार दिए हैं। जिनके चरित्र से इस्लामी संस्कृति बेहद प्रभावित है। रमजान को बरकत का महीना कहा जाता है। मुहर्रम को इससे भी ज्यादा अहमियत हासिल है, क्योंकि इस महीने पवित्र आसमानी किताब कुरआन शरीफ के अवतरित होने का क्रम शुरू हुआ था। इस्लामी इतिहास के नजरिये से, हजरत आदम अल्लाह के आदेशों की अवहेलना के चलते मुहर्रम में ही जन्नतबदर किए गए थे। इसी महीने अल्लाह ने उनकी दुआ भी कबूल की थी।

उसके बाद उन्होंने बीबी हव्वा की सहायता से दुनिया में आबादी बढ़ाने का सिलसिला प्रारंभ किया था। इस्लामी इतिहास के अहम किरदारों में एक यूनुस अलैहिस्सलाम के मछली निगलने और इस समस्या से निजात मिलने का वाकया भी मुहर्रम में ही दर्ज है। कई दिनों तक पानी में भटकने के बाद नूंह अलैहिस्सलाम की कश्ती धरती किनारे इस महीने ही लगी थी। यहूदियों के पैगंबर हजरत मूसा पर मुहर्रम में इस समुदाय का धार्मिक ग्रंथ ‘तौरेत’ अवतरित हुआ था। इस्लाम में हजरत मूसा और तौरेत की खासी अहमियत है। हजरत मूसा को जब मिस्र के बादशाह फिरऔन की फौज ने घेर लिया था, तो मुर्हरम में ही दरिया-ए-नील पार कर जान बचाई थी। इस्लाम के पैरोकारों में शुमार हरजत याकूब अलैहिस्सला की आंखों में बीनाई आने का किस्सा भी इसी महीने दर्ज है। इस्लामी इतिहास के मुताबिक, यूनिस अलैहिस्सलाम को इस महीने बीबी जुलेखा के बलात्कार के आरोपों से मुक्ति किया गया था। बकरीद के त्योहार का सबब बनने वाले हजरत इब्राहिम के पिता अत्यचारी सम्राट नमरूद के मूर्तिकार थे। सम्राट द्वारा उन्हें आग के हवाले करने पर भी उनके सकुशल बच निकलने की घटना मुहर्रम के दिनों में ही हुई थी।

इस्लामी भविष्यवाणी है कि मुहर्रम में ही दुनिया फना होगी। मुहर्रम में दुनिया के वजूद में आने की बात भी कही जाती है। हालांकि इसके बारे में विद्वान एकमत नहीं हैं। बहरहाल, ये समझना भूल होगी कि मुहर्रम का रिश्ता केवल गम से है। मुसीबतों से उबरने को प्रेरित करने वाला महीना भी इसे कह सकते हैं। खासतौर से जीवन से हर मानने वालों के लिए तो इस महीने बेहद शिक्षाप्रद कहा जा सकता है।

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