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मन का भटकना

मन इधर-उधर भटकता रहता है। इस मन को कैसे एक स्थान पर स्थिर रखें? इसे स्थिर रखने के तीन उपाय हैं। पहला, अपने सामने कुछ ऐसा रखें, जो आपको बहुत प्रिय है। जब आपके सामने कुछ ऐसा होगा, जिसे आप बहुत प्रेम करते है, तब आपका मन नहीं भटकेगा। दूसरा उपाय है कि आप अपनी सांस पर ध्यान केंद्रित करें। और तीसरा उपाय है कि अपनी दृष्टि को स्थिर रखना। जब आपकी आंखें इधर-उधर भटकती हैं, तो मन भी भटकता है। जब आपकी आंखें स्थिर होती हैं, तो मन भी स्थिर हो जाता है।

इसलिए सबसे सुंदर मूर्तियां मंदिरों में बनाई जाती हैं, ताकि आंखें बस उन्हें देखती रहें और स्थिर रहें। उन दिनों मन गहनों की ओर अधिक भटकता था, इसलिए उन्होंने मूर्तियों पर गहने सजा दिए, जिससे मन स्थिर रहे। मन सुंदर फूलों की तरफ भटक सकता था, इसलिए फूल भी रखे जाते थे। वे मूर्तियां भी दो रखते थे, एक देवता की और दूसरी देवी की। कुछ देवी को पूजते थे और  कुछ देवता को। दोनों रूप सामने होने से मन वहीं स्थिर हो जाता था।
मन बहुत चालाक होता है और उसे इसकी आदत हो गई है। इसलिए, जब भगवान की मूर्ति भी सामने हो, तो भी मन भटकता रहता है। फिर उन्होंने मूर्ति को एक ऊंचे पहाड़ पर स्थापित किया, इससे, जब तक कोई इतना ऊपर चढ़कर पहुंचता तो उसकी सांस फूल जाती और जब वह मूर्ति के आगे खड़ा होता, तो मन अपने आप स्थिर हो जाता। एक बार मन स्थिर हो गया, तो उद्देश्य पूरा हो गया। उस मन:स्थिति में कोई जो भी मांगेगा, भगवान उस इच्छा को पूरा करेंगे। अब एक सुंदर रहस्य के तरफ कदम बढ़ाएं और जो व्यक्ति अपनी दृष्टि को बिना किसी वस्तु के स्थिर रख सके और अपने मन को बिना किसी सहारे के स्थिर रख सके, वही एक योगी और एक गुरु है।
श्री श्री रविशंकर

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