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पर्यावरण के लिए

इन दिनों डर्बन में जलवायु परिवर्तन पर हो रही बैठक की चर्चा आम है। दुनिया भर की जनता को इस बैठक से काफी उम्मीद है। खास तौर पर विकासशील और अविकसित देश चाहते हैं कि कार्बन उत्सर्जन कटौती पर विश्व भर में एकमत राय बने। हालांकि, विकसित देशों के अड़ियल रवैये से इसकी उम्मीद कम ही है। वैसे, सवाल यह नहीं है कि कौन देश कितना कार्बन उत्सर्जन कर रहा है? जब बीच बहस में हम इस प्रश्न को उठाएंगे, तो निश्चित तौर पर बैठक कामयाब नहीं हो पाएगी। दरअसल, सवाल यह है कि अब आगे क्या करना है? ऐसे कौन-से तरीके हैं, जिसके जरिये पर्यावरण को महफूज बनाया जा सकता है। निजी तौर पर मेरा मानना है कि इसके लिए सबसे पहले सभी देशों को अपने यहां बैठकें करनी चाहिए। कंपनियों व उद्योगपतियों से सलाह लेकर वे प्रदूषण पर लगाम लगा सकते हैं। एक साल तक यह करने के बाद सभी देश यह देखें कि उनके यहां पर्यावरण में कितना सुधार हुआ है। इसके आंकड़े तैयार करें और फिर वैश्विक बैठक में नतीजों के साथ पहुंचें। वरना वैश्विक बैठक थोथली दलीलों पर ही खत्म होती रहेगी।
अनुपम कुमार, शालीमार गार्डेन, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश

सस्ती और सुरक्षित सेवा
मेट्रो रेल से हमारी भागमभाग जिंदगी आसान बन गई है। कुछ साल पहले तक दिल्ली में न्यूनतम दूरी के सफर में कम से कम डेढ़ घंटे लग जाते थे। लेकिन दिल्ली मेट्रो के आने के बाद हम अधिकतम दूरी को इन्हीं घंटों में पूरी कर लेते हैं। इससे हमारा वक्त बचता है। इसके अलावा दुनिया भर से तुलना करें तो, दिल्ली मेट्रो की सेवा सबसे सस्ती है। अगर आपने मेट्रो-कार्ड बनाया है, तो दस फीसदी विशेष छूट मिलती है। महंगाई के इस दौर में यह रियायत काबिले-तारीफ है। यही नहीं, देखा जाए तो इस सेवा के जरिये आप दिल्ली और एनसीआर के किसी भी कोने तक पहुंच सकते हैं। मेट्रो रेल के आने से दिल्ली में सड़क-दुर्घटनाओं में भी कमी आई है। अब रोड रेज की खबरें अखबारों में काफी कम हुई हैं। जाहिर है, मेट्रो की आरामदेह यात्रा के कई फायदे हैं।
संजय मिश्र, मुखर्जी नगर, दिल्ली

जानकारी ही बचाव है
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में एड्स के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए जाते हैं। लेकिन नतीजा शून्य ही निकलता है। दरअसल हम पेड़ काटने के लिए उसकी टहनियों, पत्तों, फल व फूल को काटते हैं, जबकि काटनी चाहिए पेड़ की जड़। एचआइवी के संक्रमण का मुख्य कारण है- हममें जागरूकता का अभाव। हमें समझना होगा असुरक्षित यौन संबंधों से एड्स होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसलिए हमें असुरक्षित यौन संबंधों से परहेज करना चाहिए। हर व्यक्ति साल में एक बार एचआईवी टेस्ट की प्रक्रिया से गुजरे। इसी में सबकी भलाई है।
एच. बी. शर्मा, जनकपुरी, नई दिल्ली

रीटेल उद्योग में विदेशी क्यों
रीटेल कारोबार में खुदरा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का निर्णय लेकर सरकार ने देश की 121 करोड़ जनता को नजरअंदाज किया है। यह फैसला कतई ही जनहित में नहीं है। यदि विदेशी कंपनियों को व्यापार की छूट दी गई, तो परोक्ष रूप से भारत की विदेश नीति प्रभावित होगी। हर गली-मोहल्ले में खुदरा व्यापार करके देश की एक भारी जनसंख्या अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही है। विदेशी कंपनियों के आने से करोड़ों लोग बेरोजगार होकर बरबाद हो जाएंगे। सरकार अगर रोजगार नहीं दे सकती, तो उसे रोजगार छीनने का भी कोई अधिकार नहीं है।
राहुल तिवारी, टेकवन स्कूल, नई दिल्ली

 

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