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हाईकोर्ट ने आवाज परीक्षण कराने के फैसले पर रोक लगाई

राजस्थान हाई कोर्ट ने सोमवार को निचली अदालत की उस अनुमति पर रोक लगा दी जिसमें सोहन लाल की आवाज का परीक्षण करने की अनुमति दी गई थी। यह अनुमति इसलिए दी गई थी ताकि नर्स भंवरी देवी के लापता होने के मामले से संबंधित कुछ ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता की जांच की जा सके।

क्लिप में सोहन लाल और शहाबुद्दीन समेत अन्य की आवाज है। सीबीआई उसकी प्रामाणिकता की जांच करना चाहती है। सोहन लाल और शहाबुद्दीन फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। न्यायाधीश कैलाश चंद्र जोशी ने बिश्नोई के आवेदन पर निर्देश जारी किया। बिश्नोई फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। उसने परीक्षण कराने की सीबीआई अदालत की अनुमति को चुनौती दी थी।

अदालत ने पिछले हफ्ते सीबीआई के अनुरोध पर एजेंसी को आवाज का परीक्षण कराने की अनुमति दी थी ताकि आडियो क्लिप में जो आवाज है उससे सोहन लाल और शहाबुद्दीन की आवाज का मिलान किया जा सके।
 सीबीआई इन क्लिप में आवाजों की प्रामाणिकता का पता लगाना चाहती है। खासतौर पर सीबीआई शहाबुद्दीन और सोहन लाल बिश्नोई की आवाज की प्रामाणिकता का पता लगाना चाहती है, लेकिन दोनों के वकीलों ने इस अनुरोध का यह कहते हुए विरोध किया कि यह संविधान का उल्लंघन और मौन रहने के अधिकार का खंडन है।

सोहन लाल के वकील ने आज उच्च न्यायालय में आवेदन देकर निचली अदालत द्वारा दी गई अनुमति को चुनौती दी। उसके बाद उच्च न्यायालय ये निर्देश दिए।

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