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प्रेम की पूजा करने वाले शख्स थे देव आनंद

गीतकार नीरज ने सदाबहार अभिनेता के साथ बिताए अपने पुराने लम्हों को किया साझा:

सन् 1954-55 की बात है। एक कवि सम्मेलन में देव साहब चीफ गेस्ट बनकर आए थे। मेरी कविता उन्हें पसंद आई। मेरे पास आए और बोले- नीरोज आई लाइक यूअर लैंग्वेज। सम डे वी विल वर्क टूगेदर।

कुछ दिन बाद एक पत्रिका में देव साहब की नई फिल्म ‘प्रेम पुजारी’ के बारे में छपा देखा। पढ़कर उन्हें पत्र लिखा और उनकी बात याद दिलाई। देव साहब ने भी वादा निभाया। मुझे तत्काल मुंबई बुलाया। वहाँ एसडी बर्मन से मुलाकात कराई। बर्मन दा ने रंगीला रे की धुन सुनाई। देव साहब ने मुझसे इस धुन पर गीत लिखने को कहा। रात भर बैठकर, रंगीला रे तेरे रंग में यू रंगा है मेरा मन, गीत लिखा। सुबह जब उन्हें सुनाया तो उन्होंने मेरा हाथ चूम लिया। तबसे ही उनके साथ फिल्म लाइन में हो लिया।

देव साहब को म्यूजिक का भी बहुत ज्ञान था। तभी तो ‘प्रेम पुजारी’ के गीत फूलों के रंग से दिल की कलम से, के एक अन्तरे में एक ऐसी कल्पना का प्रयोग हुआ जो संभवत: हिन्दी फिल्मों के लिए नई थी-

सांसों की सरगम, धड़कन की वीणा, सपनों की गीतांजलि तू
दिल की गली में, महके जो हरदम, ऐसी जूही की कली तू।
प्रेम पुजारी के बाद तो ये सिलसिला अनवरत जारी रहा। गैंबलर के सारे गीत सुपरहिट हुए। दिल एक शायर है गम आज नगमा है, आज भी लोगों की जुबां पर है। वह सच में प्रेम के पुजारी थे। वादे के पक्के। शालीन।
(नीरज के पुत्र एवं युवा कवि शशांक प्रभाकर से बातचीत पर आधारित)

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  • Web Title:प्रेम की पूजा करने वाले शख्स थे देव आनंद