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रेल की पटरियों पर खत्म होता जिंदगी का सफर

रेल की पटरियों पर जिंदगी के सफर के खत्म होनी की घटनाएं बढ़ रही हैं। पिछले साल जहां पटरियों पर इहलीला समाप्त होने की 98 घटनाएं हुई थीं। वहीं इस साल नवंबर के अंत तक ही करीब 102 मामले सामने आए हैं। यही नही रेल एक्सीडेंट के मामलों में भी इजाफा हुआ है।

ज्यादातर घटनाएं  गुड़गांव से पटौदी रूट पर हुई हैं। वहीं बजघेड़ा रेलवे फाटक व वजीराबाद रेलवे फ्लाईओवर के नजदीक भी स्थानीय निवाियों का लापरवाही पूर्ण रवैया खतरनाक साबित हो रहा है। रेलवे पटरियों के दोनों तरफ भी अवैध कालोनियों का जमावड़ा है और ट्रैक को घेरे न जाने व फुट ओवर ब्रिज की कमी के चलते ट्रैक को सीधे पार किया जाता है। जिससे अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। शहर में रेलवे स्टेशन परिसर से सटी हुई अवैध कालोनियों से भी लोग ट्रैक सीधे पार करते हैं। वहीं घरेलू वजहों या बाहरी दबाव से उपजे तनाव के बाद आत्महत्या करने के लिए भी यह रास्ता अपना रहे हैं। इस साल अभी तक रेल की चपेट में आने से 102 मौतें हो चुकी हैं जिसमें 66 मौतें रेल एक्सीडेंट के चलते हुई हैं। साइबर सिटी रूट पर ट्रेनों की संख्या की कमी के चलते रेल की छत पर सवारी करना आम बात है। सुबह कर्मचारी व छात्र बड़ी संख्या में रेवाड़ी की तरफ से गुड़गांव व दिल्ली के लिए निकलते हैं। बड़ी बात यह है कि स्कूली छात्र भी बेखौफ छतों पर सफर करते मिल जाते हैं। हाल ही में आरपीएफ ने इनके खिलाफ अभियान चलाया था लेकिन ट्रेनों की कमी के चलते लोग चाहकर भी अपना रवैया नहीं बदल पा रहे।

क्या है मुसीबत- शहर के अंदर ट्रैक न घेरे जाने व फुट ओवर ब्रिज की कमी के चलते लोग सीधे ट्रैक पार करते हैं। वजीराबाद फ्लाईओवर की ऊंचाई अधिक होने से बुजुर्गों व महिलाओं को ट्रैक पार करने के लिए फ्लाईओवर की सीढ़ियां चढ़ना भारी पड़ता है। फुट ओवर ब्रिज की कमी के चलते लोग गलत तरीके से ट्रैक पार करते हैं। वहीं सुबह दफ्तर व स्कूल, कॉलेज जाने के लिए भी दिल्ली से रेवाड़ी के बीच काफी संख्या में यात्राी पैसेंजर ट्रेनों में सफर करते हैं। भीड़ इतनी ज्यादा होती है कि अंदर ट्रेनों के खचाखच भरे होने के साथ ही छत पर भी जमघट लगा रहता है। ट्रैक घिरे न होने की वजह से आत्महत्या करने के मामले भी ट्रैक पर होते रहते हैं।

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