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फर्जी कॉलोनियों की गड़बड़ी जांच होगी चुनौती

कच्ची कॉलोनियों में अस्थाई प्रमाण पत्र मामले में धिरे दिल्ली शहरी विकास के मंत्री के कामकाज में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने एकाएक बदलाव कर दिया है। रविवार को किए गए इस बदलाव से एक तीर से दो निशाने साधे गए हैं। नई व्यवस्था में शहरी विकास का जिम्मा एक बार फिर से साफ छवि मंत्री डॉ. अशोक कुमार वालिया को सौँपा गया है। बदलाव के बाद अब डॉ वालिया को जहां उन्हें कच्ची कॉलोनियों के मसले में घिरी सरकार को इस संकट से उभारना होगा, वहीं नई एमसीडी गठन के बाद आने वाली पेचिदा दिक्कतों को दूर करना होगा। कच्ची कॉलोनियों में गलत अस्थाई प्रमाण पत्र देने का मामले दिल्ली सरकार पर दवाब के बाद यह फैसला लिया गया है।

बीते आठ माह में यह दूसरा बड़ा बदलाव है। इस बदलाव में पूर्व मंत्री मंगतराम सिंघल को हटाकर नए रमकांत गोस्वामी को मंत्री का पदभार सौंपा गया था। इसी समय डॉ वालिया जिनके पास शहरी विकास का जिम्मा था उनके विभागों को तोड़कर उसका काम मंत्री राजकुमार चौहान को सौंपा था। विधानसभा चुनावों से पूर्व दिल्ली सरकार ने कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने के लिए प्रक्रिया शुरू की थी। इस प्रक्रिया में हाल ही में कई प्रकार की गड़बड़ियां सामने आई है जांच में यह भी सामने आया है कि ऐसी कॉलोनियां जहां पर तय मानक के मुताबिक आबादी ही नहीं थी उस कॉलोनी को भी अस्थाई प्रमाण पत्र जारी किए गए थे।

कच्ची कॉलोनियों में हुई गड़बड़ी का यह मामला लोकायुक्त के समक्ष लगाया गया था। इस मामले में कहा गया था कि इस संबंध में सरकार ने ऐसे कॉलोनियों को भी अस्थाई प्रमाण पत्र दे दिए थे जहां निर्धारित आबादी नहीं थी। इस मामले में जब नए शहरी विकास मंत्री अशोक कुमार वालिया ने बात की गई तो उन्होंने कहा कि कॉलोनियों को नियमित करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। दिल्ली सरकार ने 1639 कॉलोनियों को वर्ष 2008 में ये प्रमाणपत्र बांटे थे। इन कॉलोनियों में इस समय करीब 40 लाख की आबादी रहती है जो कांग्रेस का सबसे बड़ा वोट बैंक है।

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