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अनुवाद की हिंदी

प्राय: लोगों को यह आरोप लगाते सुना गया है कि सरकारी कामकाज की हिंदी को क्लिष्ट व जटिल बनाने में सरकारी हिंदी अनुवादकों और हिंदी अधिकारियों का हाथ है। ज्ञान-संपन्न तबके में भी यही मिथ्या धारणा है कि तकनीकी भाषा के सहज शब्दों को उनके मूल रूप में अपनाने की जगह, लौहपथगामिनी जैसा मजाक विज्ञान तथा तकनीकी के क्षेत्रों में खूब किया गया है। वैसे, ऐसे किसी भी सरकारी या गैर-सरकारी दस्तावेज में रेल या रेलवे के लिए लौहपथगामिनी शब्द प्रयुक्त नहीं हुआ है। हर जगह रेल, रेलवे, प्लेटफॉर्म, स्टेशन, आदि जैसे प्रचलित शब्द ही प्रयुक्त हुए हैं।

इसी तरह साइकिल के लिए लोग द्विचक्रवाहन शब्द का तथाकथित प्रयोग बताते हैं। न जाने ऐसे कितने ही शब्दों यथा क्रिकेट, फुटबॉल आदि के मनगढ़ंत अनुवाद इंटरनेट या एसएमएस के जरिये पहुंचाने वाले लोग मिल जाएंगे। ये सारे जुमले ठीक वैसे हैं, जैसे कि यह थोथी दलील कि दिल्ली-मुंबई के टैक्सी ड्राइवर सेक्रेटेरिएट की जगह सचिवालय कहने पर गंतव्य नहीं समझ पाते।

तकनीकी शब्दों के अनुवाद और निर्माण की शुरुआत 1961 में भारत सरकार द्वारा वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग की स्थापना के साथ हो गई थी। आयोग ने सभी भारतीय भाषाओं के विद्वानों से परामर्श कर तकनीकी शब्दावली निर्माण और विकास के लिए कुल चौदह सिद्धांत प्रतिपादित किए। इन सिद्धांतों के पीछे निहित ध्येय यह था कि भारतीय भाषाओं में तकनीकी शब्दावली का ऐसा भंडार तैयार हो, जो स्वरूप में भारतीय और सुगम भी।
रविवार डॉट कॉम में राहुल राजेश

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