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सिर से मत खेलो

खेलने से निश्चय ही स्वास्थ्य बेहतर होता है, लेकिन खेल सेहत के लिए नुकसानदेह भी हो सकते हैं। खासकर पेशेवर खेल। पेशेवर खेलों में जिस गति, ताकत और कौशल का इस्तेमाल होता है, वह अक्सर सामान्य शरीर की कुव्वत से ज्यादा होता है। पेशेवर खिलाड़ी साल में लगभग 365 दिन खेलते या अभ्यास करते हैं, उनके शरीर को राहत का वक्त ही नहीं मिलता।

इंग्लैंड में हुए एक शोध ने बताया है कि फुटबॉल में सिर से शॉट मारने या ‘हेडर’ से दिमाग क्षतिग्रस्त हो सकता है। ‘हेडर’ से दिमाग में वैसी ही चोट आती है, जैसे गिरने या भारी चीज से वार करने पर आती है। इस तरह की चोट पर ध्यान एक अंग्रेज पेशेवर फुटबॉलर जेफ एसल की 59 साल की उम्र में मौत से हुआ। एसल के दिमाग में सोचने-समझने की प्रक्रिया गड़बड़ हो गई थी, उनकी मौत का कारण ‘हेड’ करने की वजह से दिमाग के उतकों का नष्ट होना बताया गया।

शोध से पता चला है कि ज्यादा ‘हेड’ करने वाले खिलाड़ियों को यह खतरा ज्यादा होता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि एक साल में 1000 से ज्यादा बार हेड करने से दिमाग को नुकसान पहुंचता है। लेकिन क्या यह सचमुच सुरक्षित सीमा है? इस पर और ज्यादा शोध की जरूरत है। वैसे एक हजार की सीमा शौकिया खिलाड़ी तो शायद कभी पार नहीं करते होंगे, लेकिन पेशेवर फुटबॉल खेलने वाले कई खिलाड़ी अक्सर इससे ज्यादा ‘हेड’ कर लेते होंगे।

पहले बॉक्सिंग एक ऐसा खेल माना जाता था, जिसमें दिमाग को नुकसान पहुंचता है। महान मुक्केबाज मोहम्मद अली इसका उदाहरण हैं। अली को बॉक्सिंग के दौरान दिमाग की चोटों की वजह से पार्किन्सोनिज्म हो गया था। बॉक्सिंग में लगने वाली चोटों से बचने का शत-प्रतिशत उपाय कुछ नहीं है। पहले बॉक्सिंग खुले हाथों होती थी, फिर सुरक्षा के लिहाज से दस्ताने आ गए, लेकिन यह पाया गया कि दस्तानों से ज्यादा चोटें लगती हैं। खुले हाथों बॉक्सिंग में हाथ चोटिल हो जाते हैं, इसलिए थोड़ी देर बाद बॉक्सर ताकतवर प्रहार नहीं कर पाता। दस्तानों की वजह से हाथ सुरक्षित रहते हैं, इसलिए वह लगातार ताकतवर प्रहार कर पाता है।

ध्यान से देखें तो तमाम खेल शरीर की प्राकृतिक क्षमताओं से कुछ ज्यादा की मांग करते हैं। हमारे हाथ 180 किलोमीटर की रफ्तार से आती टेनिस की गेंद को लगातार मारने के लिए नहीं बने, इसीलिए ‘टेनिस एल्बो’ जैसी बीमारियां होती हैं। सचिन तेंदुलकर को टेनिस रैकेट नहीं, बल्कि क्रिकेट का भारी बल्ला चलाने से टेनिस एल्बो हो गया था। अपने खेल का स्तर बनाए रखने की कोशिश में सचिन क्रिकेट के राणा सांगा हो गए हैं। उनके शरीर का कौन सा अंग जख्मी नहीं हुआ है, उनकी कुहनी, हाथ, कमर, पैर उनकी 25 बरस की क्रिकेट यात्रा का जख्म झेल चुके हैं।

एक और समस्या है, हमारा शरीर दाएं और बाएं लगभग समान होता है, लेकिन खेलों में एक तरफ का इस्तेमाल ज्यादा होता है, जैसे दाहिने हाथ के खिलाड़ी दाहिने हाथ का बहुत इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनका बायां हाथ उसके मुकाबले बहुत कमजोर हो जाता है। टेनिस और गोला फेंक जैसे खेलों में यह समस्या काफी होती है। इसके लिए अब ट्रेनर शरीर के दूसरे तरफ की मांसपेशियों के व्यायाम पर काफी ज्यादा ध्यान देते हैं।

इस सबका अर्थ यह नहीं कि खेलना बुरी चीज है, लेकिन खेलों का आनंद लेते हुए या असफल होने पर खिलाड़ी को कोसते हुए हमें याद रखना चाहिए कि पेशेवर खेल शरीर पर कितना बोझ डालते हैं। यह भी अच्छा है कि स्पोर्ट्स मेडिसिन में बहुत तरक्की हो रही है और अब डॉक्टर और ट्रेनर काफी हद तक खिलाड़ियों को ठीक-ठाक करने में कामयाब हो जाते हैं।

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