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पाकिस्तान के घावों पर मरहम लगाता ‘भारतीय’

पाकिस्तान में एक ‘भारतीय’ लोगों के घावों पर मरहम लगाता है। जब भी कहीं आतंकवादी हमला होता है या कोई आपदा आती है, सबसे पहले उसके एम्बुलेंस मौके पर पहुंचकर लोगों की मदद करते हैं। ये हैं 83 वर्षीय अब्दुल सत्तार ईदी।

ईदी के इस असाधारण योगदान को देखते हुए ही उन्हें 16वीं बार नोबल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है। यह अलग बात है कि उन्हें अब तक पुरस्कार नहीं मिला, लेकिन उनके सचिव अनवर काजमी के अनुसार उन्हें कभी इसका मलाल नहीं रहा।

इस काम में जुटे उनके संगठन ‘ईदी फाउंडेशन’ की शाखाएं 13 देशों में हैं। जहां तक पाकिस्तान की बात है तो वहां की सरकार ईदी की सेवाओं पर बहुत हद तक निर्भर है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने 28 नवम्बर को उन्हें नोबल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया। ईदी भारतीयों को भी अपने काम से सम्बंधित प्रशिक्षण देने के लिए तैयार हैं।

ईदी ने कहा, ‘मैं भारत से हूं और भारतीयों को प्रशिक्षण देने के लिए तैयार हूं।’ ईदी का जन्म गुजरात में हुआ था। उन्होंने कहा कि मुम्बई के लोगों के एक समूह ने काम शुरू करने के लिए उनके संगठन से सम्पर्क किया। ईदी ने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने उनसे भारत आने और यहां काम करने के लिए कहा था।

उन्होंने कहा, ‘हम इस वक्त 13 देशों में सेवाएं दे रहे हैं। हमारे पास 1,800 एम्बुलेंस हैं और देशभर में हमारे 450 केंद्र हैं।’ घटनास्थल पर जल्द से जल्द पहुंचने के लिए ईदी फाउंडेशन के पास हवाई सेवा भी है। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास तीन विमान और हेलीकॉप्टर हैं। हम एक नया हेलीकॉप्टर लेने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि मौजूदा हेलीकॉप्टर पुराना हो गया है।’

ईदी फाउंडेशन ने अब तक 40,000 नर्सों को प्रशिक्षण दिया है। 20,000 परित्यक्त बच्चों को बचाया गया, जबकि करीब 10 लाख बच्चों का जन्म ईदी के मातृत्व केंद्रों में हुआ।

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