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खूबसूरती की तलाश करती चार छायाकारों की तस्वीरें

खूबसूरती की तलाश करती चार छायाकारों की तस्वीरें

सुंदरता क्या है क्या यह बरसात की वे बूंदें हैं जो छत से टपकती हैं या फिर रोशनी और अंधेरे के बीच छुपी कोई नग्न काया शायद सुंदरता को उसकी संपूर्णता के साथ कैद कर लेना इतना आसान नहीं।

इसी सुंदरता की खोज और उसको संपूर्ण रूप में पेश करने की कोशिश की है चार छायाकारों ने अपनी तस्वीरों के माध्यम से और इन तस्वीरों की प्रदर्शनी राजधानी में लगाई गई।

छायाकार संजय भटटाचार्य, संजीब सेन, गौरव भारद्वाज और मनोज कुमार जैन ने संयुक्त रूप से अपनी तस्वीरों के माध्यम से प्यार और रोमांस के पलों को समेटने की कोशिश की है। उनके इन चित्रों की प्रदर्शनी रवींद्र भवन में 29 नवंबर से लेकर चार दिसंबर तक लगाई गई।

फोर एक्टस ऑफ लव नाम की इस प्रदर्शनी में इन चारों द्वारा कई विषयों पर खींची गई तस्वीरें प्रदर्शित की गई जिनमें शरीर की रूपरेखा से संबंधित कामुकता, दैनिक जीवन का जादू, प्रकृति के अनसुलझे रहस्य और एक अनकही प्यार की कथा शामिल हैं।

इन तस्वीरों में नग्नता को कई मुद्राओं में कैद किया गया है और इसके रूप को विकत कर दिया गया है ताकि इससे कलात्मक झलक मिल सके। इन तस्वीरों में शरीर के रंग को गहरा कर उजली पष्ठभूमि में पेश किया गया है जिसमें महिलाओं का शरीर अंधेरे और प्रकाश के बीच लुका-छिपी खेलता हुआ प्रतीत होता है।

सुंदरता को नग्नता के माध्यम से चित्रित करने वाले छायाकार संजीब सेन का कहना है कि उनकी तस्वीरें परंपरागत शैली पर आधारित हैं जिनमें मानव शरीर को स्टेंसिल और जलरंग (वॉटर कलर) के माध्यम से चित्रित किया गया।

उन्होंने कहा कि मैंने परंपरागत शैली के अनुसार काम करने की कोशिश की और यही कारण है कि मैंने पहले श्वेत-श्याम तस्वीरों से शुरुआत की। इसके बाद मैं जलरंग की तरफ मुड़ा।

दूसरी तरफ, संजय भट्टाचार्य ने अपनी तस्वीरों में दैनिक जीवन की भागदौड़ को कैद करने की कोशिश की है।

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