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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बढ़े महिलाओं की भागीदारी

पटना, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा बीएमडी कॉलेज द्वारा शनिवार को महिला वैज्ञानिक योजना के तहत एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस संवेदीकरण बैठक में कई रिसर्च स्कॉलर और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन आईएएस अधिकारी रविकांत ने किया।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आईजीआईएमएस के निदेशक व कुलपति डॉ अरुण कुमार ने कहा कि विज्ञान व तकनीक के क्षेत्र में लोग डॉक्टर और इंजीनियर के बारे में जानते थे। लेकिन, अब इस क्षेत्र में रिसर्च कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया जा सकता है। रिसर्च के क्षेत्र में महिलाएं अच्छा कर सकती हैं।

लेकिन, विवाह के बाद कई पारिवारिक जिम्मेदारियों के आगे वे इस क्षेत्र को छोड़ देती हैं। उन्हें प्रेरित करने के लिए ऐसी योजनाएं बहुत महत्वपूर्ण् हैं। कुमार के अनुसार आठवीं कक्षा के बाद से ही गर्ल्स स्कूलों में छात्राओं को रिसर्च के महत्व को बताया जाए।

प्रतिभावान युवतियों के इस क्षेत्र में कदम रखने से रिसर्च को एक नई दिशा मिलेगी। महावीर कैंसर संस्थान के निदेशक डा जेके सिंह ने कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं। मेडिकल साइंस में पहले जहां महिलाएं गायनोकोलॉजी चुनती थी। वहीं अब कार्डियोलॉजी हो या कैंसर का इलाज हर जगह महिला विशेषज्ञ कार्यरत हैं।

देश के विकास में महिलाओं की यह भागीदरी अहम भूमिका निभाएगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के डा एचबी सिंह ने कहा कि महिला वैज्ञानिक योजना की शुरुआत वर्ष 2002 में की गई थी। वर्ष 2003 से योजना के तहत कार्य शुरु हो गया। इसमें 65 फीसदी महिलाएं 35-40 वर्ष आयु सीमा में हैं।

एक साल में लगभग 1000 आवेदन आते हैं। 200 के लगभग आवेदनों का चयन होता है। देखा जाए तो ज्यादातर महिलाएं बायलॉजी से संबंधित विषयों पर शोध के प्रस्ताव भेजती हैं। इन्हें स्कॉलरशिप भी दी जाती है। पहले बिहार से महिलाओं की संख्या बहुत कम थी। अब धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ रही है।

मगध महिला कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर डॉली सिन्हा ने कहा कि रिसर्च के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती रूचि से सकारात्मक बदलाव आया है। लेकिन, कई ऐसी महिलाएं हैं जो अपने रिसर्च को दूर तक नहीं ले जा पातीं। उन्हें अपने प्रोफेशन में पारिवारिक जिम्मेदारी और पुरुष प्रधान मानसिकता वाले समाज से लड़ना होता है।

अध्यक्षीय भाषण में बीआरए यूनिवर्सिटी के कुलपति डा विमल कुमार ने कहा कि रिसर्च में महिलाओं की भागीदारी एक प्रासंगिक विषय है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में महिलाओं की जरूरत है। वैशाली के बीएमडी कॉलेज में बॉटनी की अध्यक्ष डा तनुजा ने कहा कि इस कार्यक्रम में 35 प्रतिभागियों ने अपने रिसर्च विषय पर प्रेजेंटेशन दिया। पटना यूनिवर्सिटी, मगध यूनिवर्सिटी, बीआर अम्बेदकर यूनिवर्सिटी, टीएम भागलपुर, वीरकुवंर सिंह यूनिवर्सिटी से विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

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